कुठेड़, पोखी, महोग, नाहवीधार (बाग), तुमन, ग्वालपुर, तेवन, सराहन आदि पँचायत क्षेत्रों केगाँव च्वासी गढ़ पर्वत श्रृँखला के चारों ओर फैले हैँ।समुद्र तल से लगभग 9000 फीट की ऊँचाई पर स्थितच्वासी गढ़ शिखर सुकेत रियासत की सबसे ऊँचीचोटी मानी जाती थी। च्वासी गढ़ औरच्वासी सिद्ध मँदिर का सुकेत के इतिहास मेँअपना विशिष्ट स्थान है।इस गढ़ की तीनदिशाओं मे सुरक्षा की दृष्टि से गहरी खाईबनी है। पश्चिम भाग की ओर खतरनाक ढलान परबने चबूतरे से राजसी काल मे मृत्युदंड प्राप्तअपराधी के शरीर से भारी पत्थर बाँध कर उसे इसगहरी खाई मे धकेल दिया जाता था।
करसोग क्षेत्र के वरिष्ठ समाज सेवी व संस्कृत मर्मज्ञ डाक्टर जगदीश शर्मा जी और वरिष्ठ इतिहासकार डाॅक्टर हिमेंद्र बाली जी बताते है कि गढ़ कानिर्माण सुकेत सँस्थापक राजा वीर सेन ने 765 ई में किया था।तथा च्वासी क्षेत्र के युवा समाज सेवी संस्कृत मर्मज्ञ कारदार च्वासीगढ़ टी सी ठाकुर जी का कहना है कि मन्दिर का इतिहास बौद्ध धर्म केतन्त्रयान के 84 सिद्धाचार्यो के सुकेत मे प्रभाव होने के प्रमाणो की पुष्टि करता है।मँदिर मेवज्ररूप (शिला)व अन्य श्रीविग्रहो की पूजाअर्चना के साथ प्रसाद,” करोड़े”व चिमटे चढ़ाएजाते है।इस टिब्बे के चारों ओर मनोरम और अनुपमसौँदर्य का सृजन करती पहाड़ियों मन कोरोमांचित करती हैँ।
✍️ टी सी ठाकुर कारदार
च्वासीगढ़ करसोग मण्डी हिमाचल प्रदेश
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