✍️ आचार्य डाॅ. कर्म सिंह
इजरायल पर हमास द्वारा आतंकी हमले किए जाने के बाद भारत में इसकी घोर निंदा की और उसके साथ-साथ फिलिस्तीनियों की सहायता के लिए भी राहत सामग्री भेजी। कुछ कट्टरपंथी इस्लामी राष्ट्रों ने हमास, हिजबुल्ला और हूती इन तीनों आतंकवादी संगठनों का समर्थन करने का ऐलान किया और यह अब जगजाहिर हो चुका है कि ईरान तुर्की पाकिस्तान कतर जैसे इस्लामी राष्ट्र इन आतंकवादी संगठनों को भारी भरकम धन और हथियार उपलब्ध करवा रहे हैं। इसराइल क्योंकि अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है इसलिए वह अपनी विजय निश्चित करने तथा अपने एकमात्र राष्ट्र को बनाए रखने के लिए हर हालत में सफलता प्राप्त करना चाहेगा और इसके लिए पूरा इसराइल एकजुट होकर युद्ध कर रहा है । इधर आतंक की फैक्ट्री पाकिस्तान में भारत में गजवा ए हिंद की मुहिम के साथ-साथ बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के खिलाफ भी मोर्चा भी खोल दिया है। क्योंकि भारत के वर्तमान सशक्त नेतृत्व के डर से पाकिस्तान भारत के साथ सीधी कार्यवाही करने में घबरा रहा है। इसलिए उसने अपनी भड़ास निकालने के लिए अपनी सेना और अन्य आतंकवादी संगठनों को अफगानिस्तान और बलूचिस्तान के विरुद्ध काम पर लगा दिया है। लगभग पिछले 50 सालों से तालिबान के लाखों लोग पाकिस्तान के सीमांत क्षेत्र में बस रहे हैं और उनकी कई पीढ़ियां यहां अपनी गुजर बसर कर रही है परंतु तालिबान और पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से आतंकवादी हमले देखने को मिल रही हैं। इसलिए पाकिस्तान ने तालिबान के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है और एक बहुत बड़ी कार्यवाही करते हुए 50 वर्षों से पाकिस्तान की जमीन पर बस रहे तालिबानियों को उजाडना शुरू कर दिया है। उनके घरों पर बुलडोजर चला कर उनको तहस-नहस कर दिया गया है और तालिबानी शरणार्थियों को वापस अपने देश में जाने के लिए मजबूर होना पडा हैं । दूसरी ओर पाकिस्तान बलूचिस्तान के आजादी के आंदोलन को भी दबाने में लगा हुआ है । यह सभी जानते हैं कि पाकिस्तान बलूचिस्तान के संसाधनों का डटकर दोहन करता आया है और जब भी बलूचिस्तान में आजादी की मुहिम को लेकर के कोई आंदोलन तेज होता है तो पाकिस्तान फौज कार्यवाही करके बंदूक की नोक पर उसको दबाने का प्रयास करती है । अब बलूचिस्तान का यह आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। पाकिस्तान के अपने अंदरूनी हालात अच्छे नहीं है ।राजनीतिक तौर पर पूरी तरह से अस्थिरता है । कब कौन प्रधानमंत्री बना दिया जाए , किसको कब हटाकर जेल में डाल दिया जाए या देश से निकाल दिया जाए इन विषयों में हमेशा अनिश्चितता बनी रहती है।

पाकिस्तान में मिलिट्री का शासन पिछले दरवाजे से होता आ रहा है और जो सेना का विरोध करता है उस नेता को जेल में डाल देते हैं या देश निकाला देकर पाकिस्तान से ही बेदखल कर देते हैं। पाकिस्तान में अब तक कई प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति की दुर्घटनाओं में मारे जा चुके हैं । यह एक ऐसा देश है जो अपने नेताओं और अपने लोगों को मारने में भी कोई संकोच नहीं करता है। विडंबना यह है कि एक तरफ मजहब के नाम पर इस्लाम को मानने वाले कट्टरपंथी अन्य मतावलंबियों को मारना चाहते हैं, उनके देश और जमीन को हडपना चाहते हैं दूसरी ओर मुस्लिम देश आपस में भी लड़ने मरने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं । पाकिस्तान अफगानिस्तान तालिबान बलूचिस्तान बांग्लादेश की आपस की लड़ाइयां को उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। एक तरफ अमेरिका जैसे देश पाकिस्तान को आतंकवाद से लड़ने के लिए धन देते हैं और उस धन का दुरुपयोग करते हुए पाकिस्तान आतंक की फैक्ट्रियां चलाता है । कुछ ऐसा ही हमास के आतंकवाद को संरक्षण देने में भी हुआ है। अमेरिका से अरबों रूपया ईरान को मिला और ईरान ने वह पैसा हमास, हूती और हिजबुल्ला जैसे आतंकवादी संगठनों को दे दिया जिससे इन्होंने हथियार खरीदे और अपनी सेना को बढ़ाया । इसी धन के बल पर आज हमास ने गाजा पट्टी की जमीन के भीतर कई किलोमीटर की सुरंगे बनाकर हथियारों का जखीरा वहां जमा कर रखा है और वहीं से वह इजरायल के विरोध में इस युद्ध को चला रहे हैं । अब आतंकवाद का समर्थन खुलेआम हो गया है जिसमें ईरान इराक तुर्की और पाकिस्तान और लेबनान की भूमिका को सरेआम आतंकवाद के पक्ष में देखा जा सकता है । पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र होने के नाते अन्य देशों को भी धमकियां देता रहता है और परमाणु शक्ति होने के बाद भी दुनिया भर के देशों से भीख मांग कर गुजारा करना उसकी आदत बन गई है। जिस तरह से पाकिस्तान के हालात बद से बढदकर होते जा रहे हैं उसके लिए स्थिति और भी गंभीर होने वाली है परंतु भारत की चिंता यह है कि कुछ चीनी और पाकिस्तान परस्त राजनीतिक दल और कुछ मजहबी कट्टरपंथी लोग भी उनकी खुलेआम सहायता करते हुए भारत में माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं । हालांकि भारत के सशक्त नेतृत्व के कारण उनको नियंत्रण में रखा जा रहा है परंतु यह स्थिति राजनीतिक तौर पर कब तक बनी रहेगी, यह कहना मुश्किल है इसीलिए कुछ राजनीतिक दलों और इन मजहबी कट्टरपंथियों की यह कोशिश है कि वर्तमान सरकार का विरोध किया जाए। इस विरोध में विश्व के कुछ भारत विरोधी कट्टरपंथी देश भी शामिल हो जाए तो उसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इस दृष्टि से भारत के सामने भी चुनौतियां कम नहीं है । इसलिए देश के राष्ट्रवादी नागरिकों को देश को आत्मनिर्भर तथा सैया बल को सशक्त बनाकर और आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाकर अपने देश को संगठित और शक्तिशाली बनाने के प्रयास निरंतर जारी रखने होंगे ताकि भविष्य की चुनौतियों का डटकर सामना किया जा सके और भारतीय अस्मिता, संस्कृति तथा राष्ट्रधर्म के आधार पर विश्व समुदाय में अपना सर्वोच्च स्थान बनाने की दिशा में अग्रसर हुआ जा सके।