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कैबिनेट ने नेपाल में 669 मेगावाट लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने 669 मेगावाट लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना (एलएएचईपी) के लिए 4.99 रुपए प्रति यूनिट के लेवलाईज्‍ड टैरिफ पर 5792.36 करोड़ रुपए (पूर्णता की लागत) के निवेश को मंजूरी प्रदान की।

समिति ने एलएएचईपी के क्रियान्‍वयन के लिए नेपाल में स्‍थापित एसजेवीएन की पूर्ण स्वामित्व वाली अधीनस्‍थ कंपनी स्‍पेशल पर्पज व्‍हीकल एसजेवीएन लोअर अरुण पावर डेवलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (एसएलपीडीसी) के लिए कार्योत्‍तर अनुमोदन भी प्रदान किया है। इसके अतिरिक्त, समिति ने एसएलपीडीसी में 1737.70 करोड़ रुपए के इक्विटी निवेश को भी मंजूरी प्रदान की है।

167.25 मेगावाट की चार इकाइयों वाली 669 मेगावाट की लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना, नेपाल के प्रांत-1 के संखुवासभा जिले में अरुण नदी पर 900 मेगावाट की अरुण-3 जलविद्युत परियोजना के डाउनस्ट्रीम में अवस्थित है। टेलरेस विकास के रुप में अरुण 3 एचईपी में कोई जलाशय या बांध नहीं होगा और यह अरुण-3 एचईपी के साथ मिलकर एक टेंडम प्रचालन प्रणाली के रूप में कार्य करेगी। यह परियोजना सालाना 2900 मिलियन यूनिट विद्युत का उत्‍पादन करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

एसजेवीएन ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से परियोजना को हासिल किया है और इस परियोजना को भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के सक्रिय सहयोग से बिल्ड-ओन-ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बूट) आधार पर क्रियान्वित किया जा रहा है। लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना 60 माह की अवधि के भीतर कमीशन की जाएगी। बिहार के सीतामढ़ी तक निर्माणाधीन 217 किलोमीटर 400 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन के माध्यम से उत्‍पादित विद्युत की निकासी की जाएगी।

भारत के प्रधानमंत्री और नेपाल के प्रधानमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में, नेपाल के निवेश बोर्ड और एसजेवीएन के मध्‍य दिनांक 01 जून 2023 को एलएएचईपी के परियोजना विकास करार पर हस्ताक्षर किए गए थे।

एसजेवीएन नेपाल के सामाजिक-आर्थिक विकास में एक प्रमुख भागीदार और विश्वसनीय निवेशक है। मेगा जलविद्युत परियोजनाओं का क्रियान्वयन दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी प्रयास है, क्योंकि इससे भारत तथा नेपाल की आर्थिक वृद्धि होगी। इस परियोजना से उत्‍पादित विद्युत का नेपाल तथा भारतीय ग्रिड में पूर्ण उपयोग किया जाएगा और ग्रिड को स्थिरता प्रदान करने में सहायता मिलेगी। ग्रिड में मूल्यवान नवीकरणीय विद्युत को जोड़ने के अतिरिक्‍त, इस परियोजना से सालाना लगभग 26 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। परियोजना से भारतीय ठेकेदारों को निर्माण कार्यों में भाग लेने के अतिरिक्‍त भारत से नेपाल तक निर्माण सामग्री तथा उपकरणों के निर्यात का अवसर भी प्रदान करेगी। यह दोनों देशों के नागरिकों को रोजगार के अवसर प्रदान करेगी और दोनों देशों के मध्‍य द्विपक्षीय संबंधों में सुधार करेगी।

वर्तमान में, एसजेवीएन नेपाल में 900 मेगावाट अरुण-3, 669 मेगावाट लोअर अरुण तथा 630 मेगावाट अरुण-4 जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है, जिनकी कुल क्षमता 2199 मेगावाट है।

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