हिंदी दिवस पर राजभाषा का स्मरण
✍️ आचार्य डॉ कर्म सिंह कोई भी देश जब स्वतंत्र होता है तो प्राथमिकता रहती है अपनी मिट्टी अपना देश अपनी भाषा और संस्कृति। प्राचीन काल से संस्कृत भारतवर्ष की बोलचाल और साहित्य की भाषा रही कालांतर में संस्कृत से…
राज्य स्तरीय राजभाषा सम्मान समारोह के समय में परिवर्तन
👉 प्रातः 11 बजे के स्थान पर प्रातः 10 बजे से होगा आयोजन निदेशक, भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश डॉ पंकज ललित ने आज यहाँ जानकारी देते हुए बताया कि भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा दिनांक 14 सितम्बर, 2023 को…
आनी में विचित्र परंपराओं का सिलसिला जारी
👉 13 सितंबर की रात्रि को देअखौल में ठहरेंगे देवता शमशरी महादेव ✍️ छबिन्द्र शर्मा, आनी आनी क्षेत्र के विभिन्न गाँवों में इन दिनों आराध्य गढ़पति देवता शमशरी महादेव के सत्राला मेले की खूब धूम मची है। बता दें कि…
आनी के शीगागी गाँव में हुआ अनूठी परंपरा का निर्वहन
क्षेत्र के गढपति देवता शमशरी महादेव और मालाणा के देवता जमलू के बीच निभाई जाती प्राचीन समय में हुए युद्ध की रस्म ✍️ छबिन्द्र शर्मा, आनी आनी क्षेत्र के विभिन्न गाँवों में इन दिनों आराध्य गढ़पति देवता शमशरी के सतराला…
प्राकृतिक आपदा, पानी और तृतीय विश्वयुद्ध
✍️ हितेन्द्र शर्मा 21वीं सदी का विश्व युद्ध पानी के लिए होगा, ऐसा प्राय कहा और सुना जाता है। ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने से सदियों पुराने ग्लेशियर पिघलने लगे हैं। समुद्र का जलस्तर ऊपर उठने लगा है। पहाड़ धीरे-धीरे बौने…
किराएदार : एक आत्मचिंतन
पापा! ये किराएदार कौन होते हैं? यही उसका प्रश्न था। मेरी बेटी जब पांच साल की थी और मैं उसे स्कूल बस में बिठाने जा ही रहा था कि रास्ते में चलते चलते बड़ी मासूमियत भरी आवाज़ में अचानक ही…
शिमला में क्यों खटकने लगे देवदार?
अखबारों और सोशल मीडिया पर आजकल एक चर्चा जोर पकड़ रही है कि शिमला में अंग्रेजों के समय के लगे देवदार, शिमला शहर के लिए खतरा बने हुए हैं और अब ये देवदार के पेड़ कुछ बुद्धिजीवियों की नजरों में…
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि पर विशेष
✍️ डॉ. कर्म सिंह आर्य हम गुलाम पैदा हुए हैं परंतु मरेंगे आजाद होकर तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा कदम कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा यह जिंदगी है कौम की कौम पर लुटाए जा…
रोमांच से भरपूर चवासी सिद्ध यात्रा
…..यात्रा संस्मरण….. सुकेत क्षेत्र प्राकृतिक, ऐतिहासिक, वैदिक व पौराणिक प्रमाण व आख्यान की वह थाती है जिसकी अनुभूति के सांस्कृतिक व धार्मिक जीवन में सहज ही होती है। सुकेत का नामकरण आबाल ब्रह्मचारी व व्यासपुत्र शुकदेव की साधनास्थली से व्युत्पन्न…