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साहित्य

जो सुख छज्जू दे चौबारे, ओ बलख न बुखारे

कहावतों और लोकोक्तियों की दुनिया रहस्यमयी होती है। इनका अपना इतिहास और मजबूत आधार है इसलिए इनकी उम्र मानव सभ्यता जितनी होती है। यह कहावतों की ताकत ही है कि हम इन्हें याद रख पाते हैं परंतु इनका इतिहास भूल…

कविता : सहर

✍️ किरण वर्मा, रैहल (शिमला)

सतलुज घाटी में शणचा देवोत्सव : ऐतिहासिक संदर्भ

सतलुज घाटी में श्रावन मास में जिला मण्डी के सुकेत क्षेत्र व जिला शिमला के पूर्ववर्ती शांगरी की राजधानी बड़ागांव में शणचा मेले का आयोजन सम्बन्धित देवों की उपस्थिति में होता है. शणचा वास्तव में ऐसा देवोत्सव होता है जिसमें…

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की सह-आचार्य डा. प्रियंका वैद्य का हुआ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी में बतौर अध्येता चयन

राज्यस्तरीय सम्मानित लेखक डा. प्रियंका वैद्य करेंगी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी में भगिनी निवेदिता पर शोध हितेन्द्र शर्मा, शिमला हिमाचल प्रदेश की साहित्यकार डॉ प्रियंका वैद्य पिछले पंद्रह वर्षों से हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। वह…

पूर्वाग्रह ग्रसित कुछ लोगों द्वारा इतिहास को विकृत करने की साजिश

इतिहास समाज का वह दर्पण होता है जो अतीत का तथ्यात्मक या सत्याभासित विवरण प्रस्तुत करता है ताकि वर्तमान को अतीत की सही सूचना प्राप्त हो सके। इतिहास लेखन के लिये पुरातात्विक, पुरालेख, सिक्के, डायरियां, सरकारी दस्तावेज, लोकवार्ताएं व लोकगीत…

भाषाई राजनीति

अब भाषा का व्याकरण एवं स्वयं भाषा राजनीति की शिकार हो रही है, राजनैतिक वैय्याकरणी उभर रहे हैं, यद्यपि विशुद्धता स्वर्णिम है, तथापि विशुद्धता सदैव ठहराव पैदा करती है , जो उसकी मृत्यु का कारण हो जाती है, भाषा में…

समाजसेवा एवं सम्मान का प्रतीक डॉ श्रीकांत अकेला

जिला सिरमौर के नाहन में शिक्षक के रूप में कार्यरत” डॉ श्रीकांत अकेला “जो अपने आप में बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यकित्व है जो एक शिक्षक के साथ साथ वरिष्ठ समाजसेवी, कवि, साहित्यकार, पत्रकार, सम्पादक, पर्यावरणविद् और राज्यस्तरीय शंखनाद मीडिया…

आकाश / शून्य एवं वायु

आकाश अर्थात शून्य,, अर्थात नहीं होना,,, ये नहीं होना ही होना है,, अगर शून्य न हो, स्पेस न हो, तो होने वाली वस्तु, या ख़्याल, या कल्पना,, या जो अस्तित्व में है नहीं हो सकता,, शून्य का भी अस्तित्व है,,…

आकाश / स्पेस जो सबको चाहिए

बहुत बार मनुष्य चोटी पर होता है,, पर उसे पता नहीं होता वह चोटी पर है जय , वह समझता है आसमां अभी भी उसे नहीं मिला और वह वहाँ से अवसाद में छलांग लगा देता है,, जबकि सत्य यह…

साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में मौन साधक हितेन्द्र शर्मा 

तटस्थ रह कर नदियों को मार्ग देना, नदियों अर्थात राहियों को उद्गम से लेकर मंज़िल तक मौन रह ले जाना तट ही जानता है कि कितना मुश्किल है, वेगधारक नदी बहुत बार मंज़िल तक पहुँचने की जल्दी में अपने संरक्षक…