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धर्म-संस्कृति

नवरात्रि महोत्सव – शक्ति की उपासना एवं विजय का पर्व

या देवि सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। नवरात्रि महोत्सव का महत्व भारत में शक्ति का महत्व आदिकाल से ही माना गया है। चाहे धर्म हो, अर्थ हो, काम हो और चाहे मोक्ष हो, इन चारों पुरुषार्थों की…

संस्कृत की विकास-यात्रा

यावन्न संस्कृतयुवान् प्रगतिं विधातुंचेत्त्वं सहायकरणे रमसे कदापि।नो योग्यतां दमयितुं च तथेह तेषांईर्ष्यां च न त्यजसि संस्कृतवृद्धिरेव।। जब तक संस्कृत भाषाविद युवाओं को आगे बढ़ने में सहयोग नहीं करेंगे। उनकी योग्यता को दबाने का प्रयास नहीं करेंगे। परस्पर ईर्ष्या करना नहीं…

आबकारी कमिश्नर एन सी बैकटा ने डॉ. हिमेन्द्र बाली के मण्डी पर शोधात्मक कार्य को सराहा

आबकारी विभाग में कमीश्नर रहे एन सी बैकटा ने डॉ. हिमेन्द्र बाली “हिम”की मण्डी जिले पर आधारित शोधपूर्ण पुस्तक “हिमालय गरिमा : मण्डी का सांस्कृतिक वैभव” पुस्तक में किये गये श्रमसाध्य कार्य को सराहा। डॉ. हिमेन्द्र बाली “हिम”की मण्डी जिले…

ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध है करसोग का च्वासी(चौरासी) गढ़

कुठेड़, पोखी, महोग, नाहवीधार (बाग), तुमन, ग्वालपुर, तेवन, सराहन आदि पँचायत क्षेत्रों केगाँव च्वासी गढ़ पर्वत श्रृँखला के चारों ओर फैले हैँ।समुद्र तल से लगभग 9000 फीट की ऊँचाई पर स्थितच्वासी गढ़ शिखर सुकेत रियासत की सबसे ऊँचीचोटी मानी जाती…

शिमला फ्लाइंग फेस्टिवल से जुन्गा को मिलेगी पर्यटन स्थल के रूप में पहचान

12 से 15 अक्टूबर तक द ग्लाइड इन जुन्गा में किया जा रहा है शिमला फ्लाइंग फेस्टिवल का आयोजन हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता और साफ़ आबोहवा तथा समृद्ध संस्कृति के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मशहूर…

संस्कृत संस्कृति के अनन्य उपासक आचार्य दिवाकर दत्त शर्मा

✍️ आचार्य डा कर्म सिंह बात उस समय की है जब राजा श्री वीरभद्र सिंह जी हिमाचल प्रदेश की लोकप्रिय मुख्यमंत्री थे और श्री प्रेम शर्मा जी निदेशक भाषा संस्कृति विभाग । उसी समय में हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी…

सतलुज घाटी में हरितालिका तीज पर चिड़त्री पर्व परम्परा

✍️ डॉ. हिमेन्द्र बाली शैलेन्द्र हिमालय के पश्चिम के अंचल में बसा हिमाचल मानव सृष्टि का उद्गम स्थल रहा है. यहीं जलप्लावन के बाद मनु की सप्तर्षियों सहित नाव रूकी थी. जल प्लावन के क्षीण होने पर मनु ने शतरूपा…

एक महीने की परिक्र्मा के बाद गर्भगृह मे पुनः विराजे गुग्गा महाराज

पांगणा जैसे समृद्ध इतिहास, संस्कृति और प्राचीन परंपराओ वाले गांव को देखने और समझने के लिए समय समय पर शोद्धार्थी यहा आते रहते है। भाद्रपद माह मे गुग्गा जी की दिन-रात गूँजती लोकगाथाओ से पांगणा का वातावरण काफी सुहावना हो…

आनी में विचित्र परंपराओं का सिलसिला जारी

👉 13 सितंबर की रात्रि को देअखौल में ठहरेंगे देवता शमशरी महादेव ✍️ छबिन्द्र शर्मा, आनी आनी क्षेत्र के विभिन्न गाँवों में इन दिनों आराध्य गढ़पति देवता शमशरी महादेव के सत्राला मेले की खूब धूम मची है। बता दें कि…

आनी के शीगागी गाँव में हुआ अनूठी परंपरा का निर्वहन

क्षेत्र के गढपति देवता शमशरी महादेव और मालाणा के देवता जमलू के बीच निभाई जाती प्राचीन समय में हुए युद्ध की रस्म ✍️ छबिन्द्र शर्मा, आनी आनी क्षेत्र के विभिन्न गाँवों में इन दिनों आराध्य गढ़पति देवता शमशरी के सतराला…