पढ़ा लिखा, कट्टर ईमानदार मुख्यमंत्री और भ्रष्टाचार के आरोपों को झुठलाने की चुनौती
✍️ आचार्य डॉ. कर्म सिंह
स्वामी दयानंद सरस्वती ने सत्य प्रकाश में राजधर्म प्रकरण में लिखा है – राजा के अधीन सभा एवं मंत्री परिषद, मंत्री परिषद के अधीन राजा, तथा राजा और मंत्री परिषद दोनों ही प्रजा के अधीन रहें। एक व्यक्ति को कभी स्वतंत्र शासन का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। यह है -असली लोकतंत्र । भारत विश्व का एक प्रमुख लोकतांत्रिक देश है। हर पांच वर्ष बाद चुनाव होने पर सरकारें बदलती हैं। यही चुनी हुई सरकार नियम कानून बनाकर अथवा उनमें संशोधन करके संविधान की शपथ लेकर देश का संचालन करती हैं। किसी तरह का विवाद होने पर लोकतंत्र और संविधान को बचाने की दुहाई दी जाती है परंतु अब ऐसा लगने लगा है कि लोकतंत्र वोटो तक सीमित हो गया है। उसके बाद राजनीतिक दल संविधान के अंतर्गत राज्य का संचालन करने का बेशक दम भरते रहें परंतु कहीं न कहीं स्वार्थवश भ्रष्टाचार का साम्राज्य खड़ा होता रहा है। परिवारवाद लोकतंत्र का पर्याय बनता जा रहा है ऐसे में देश के सामने लोकतंत्र और संवेदन संविधान की व्यवस्थाओं को बनाए रखना एक चुनौती बनता जा रहा है। विकास के साथ-साथ भ्रष्टाचार ने दीमक की तरह देश को खोखला कर दिया है। यही कारण है कि 70 सालों के बाद अमीर और अधिक अमीर होता जा रहा है और गरीब दिन प्रतिदिन गरीबी में जकडते जा रहे हैं। कहने को तो जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग गरीबी की रेखा से ऊपर उठ रहा है परंतु बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों शरणार्थियों तथा मजहबी आधार पर जनसंख्या की बढ़ोतरी नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।

बढ़ती हुई जनसंख्या के आधार पर सभी को भोजन मकान बिजली पानी मुफ्त में देना सरकार के वश की बात नहीं रही है । भले ही चुनाव में रेवड़ी कलचर का चलन बढ़ने लगा है और बिजली पानी सोना चांदी मोबाइल लैपटॉप राशन आदि बहुत कुछ मुफ्त में बांटा जा रहा है परंतु यह मुफ्तखोरी कहीं न कहीं देश की अर्थव्यवस्था को ऊंचाइयों से गिरकर जमीन पर पटकने की ओर आगे बढ़ती हुई नजर आ रही है। गरीबी का नारा एक राजनीतिक षड्यंत्र बनता जा रहा है। गरीबी हटाओ का नारा देने के बाद भी गरीब और पिससता जा रहा है। भारत में गरीबी और अमीरी के बीच बहुत बड़ी दरार है जिसमें मध्यम वर्ग पूरी तरह पिसता जा रहा है। राष्ट्र की अर्थनीति को सुदृढ़ बनाने में मध्यम वर्ग का सर्वाधिक योगदान रहता है परंतु योगदान के अनुसार उसे उसका अधिकार नहीं मिल पाता है। इन्हीं सामाजिक विसंगतियों के कारण समाज में असंतोष भी पनपता है। पिछले वर्षों में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए लोकपाल की मांग करने के लिए अन्ना हजारे अनशन पर बैठे । लाखों लोगों ने उनका समर्थन किया लेकिन अन्ना हजारे के आंदोलन को अरविंद केजरीवाल ने कब राजनीति में बदल दिया, देश को पता ही नहीं चल सका। बात बात पर अनशन की धमकी देने वाले अन्ना हजारे अरविंद केजरीवाल के भ्रष्टाचार पर मौन धारण किए हुए हैं । अब वह कट्टर ईमानदार के आधा मंत्रिमंडल तिहाड़ की जेल में पहुंच जाने के बाद भी अनशन की बात नहीं करते। इसलिए उनका अनशन भी सिलेक्टिव नजरिए से देखा जाने लगा है। अन्ना हजारे को इस आंदोलन के लिए लोगों ने जो करोड़ों रुपया दिया वह कहां गायब हो गया, यह कोई भी बताने के लिए तैयार नहीं है। एक भ्रष्टाचार को बचाने की आड़ में भ्रष्टाचार की एक लंबी श्रृंखला चल पड़ी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उसके मुखिया बने। लोगों को बहुत उम्मीदें थी कि यह व्यक्ति जैसा बोल रहा है वैसा कुछ कर पाया तो दिल्ली की दिशा और दशा सुधर जाएगी परंतु अपने भाषणों के विपरीत आचरण से अंदर खाते वह भ्रष्टाचार को मिटाने की बजाय स्वयं इस दलदल में फंस गए जिससे समाज को निकालने के लिए उन्होंने संकल्प लिया था। भ्रष्टाचारी मंत्रियों को संरक्षण प्रदान करना उनके लिए अब कठिनाई बन गया है। दिल्ली सरकार के उप मुख्यमंत्री मंत्री और विधायक जेल में है। संयोजक के नाते अकेले निर्णय लेते हैं। और आतंकवादियों खालीस्तान समर्थकोन ,चीन पाकिस्तान और भारत विरोधी अन्य देशों से भी धन इकट्ठा करने की चर्चा होने लगी है । बिना सरकारी कामकाज ,बिना मंत्रालय के अकेले मुख्यमंत्री के लिए सच को सामने लाने के लिए नारको टेस्ट तथा ब्रेन मैपिंग करवाने की मांग जी उठने लगी है। बस कोशिश यही होती रही कि भ्रष्टाचार का कोई सबूत किसी के हाथ न लगने पाए। मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए न कोई मंत्रालय उनके पास है न ही वह किसी फाइल पर हस्ताक्षर करते हैं। हां अब घोटाले के विवरण सामने आने से मैडम सीएम के दखल पर शीश महल का निर्माण किए जाने की जानकारी जरूर मीडिया के माध्यम से बाहर आने लगी हैं परंतु केजरीवाल उस पर भी अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं । बड़े-बड़े राजनेताओं के भ्रष्टाचारों के कागज हाथ में मंचों पर लहराने वाले अरविंद केजरीवाल अब भ्रष्टाचार पर नहीं बोलते ।अब उनके लिए पराली से उठने वाला धुआं इको फ्रेंडली हो गया है। अब उन्हें दिल्ली में कूड़े के पहाड़ नजर नहीं आते । उन्होंने खालिस्तान के बहाने पंजाब में भी खूब राजनीति की है और आप के शासन में पंजाब में नशाखोरी और खालीस्तान की गतिविधियां बहुत अधिक बढ़ती हुई नजर आती है। नशा समाप्त करने का नारा लेकर सत्ता में आई सरकार खुद सत्ता के नशे की चपेट में आ गई है।
दरअसल वे चुनाव जीतने के लिए दिल्ली का मुख्यमंत्री के बनने के बाद भी स्वयं को भारत का प्रधानमंत्री होने के सपने देखने लगे हैं। चुनाव में धान की जरूरत रहती है । इसलिए ऐसी संभावना है कि धन जुटाने के लिए आतंकवादियों तथा देश के विरोधी संगठनों से भी खूब पैसा इकट्ठा किया है ताकि वह अन्य प्रदेशों में भी रायता फैला सकें। जब मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन शराब घोटाले और अन्य भ्रष्टाचारों का सामना करते हुए जेल की दीवारों के पीछे पहुंचे, तब ऐसा लग रहा था की यह बड़े भोले भाले से दिखने वाले लोग भ्रष्टाचारी नहीं हो सकते हैं परंतु इतने लंबे अरसे तक अपने भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज करने के लिए वे कुछ नहीं कर पाए और उसके विपरीत उन पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित होते हुए दिख रहे हैं जिससे उनके बहुत प्रयास करने के बाद भी जमानत नहीं हो पा रही है । ईडी अब केजरीवाल को पूछताछ के लिए बुलाना चाह रही है परंतु वे चुनाव में व्यस्तता के बहाने ईडी का सामना करने के लिए तैयार नहीं है ।वह उल्टा ईडी और सीबीआई पर ही प्रश्न खड़ा कर रहे हैं । भविष्य में न्याय की प्रक्रिया किस तरह से इस मामले को सुलझाने का प्रयास करती है यह भी जल्द सामने आ सकेगा परंतु लोगों का यह कहना ठीक लगता है कि यदि केजरीवाल ईमानदार हैं तो वह ईडी सीबीआई का सामना करें उनका झूठ साबित करें और स्वयं को निर्दोष बताकर शराब घोटाले में भ्रष्टाचार के आरोपों का खंडन करते हुए सत्येंद्र जैन मनीष सिसोदिया को भी जेल से छुड़वाने का प्रयास करें । अगर वह अपनी बेगुनाही में कुछ सबूत पेश कर सकते हैं तो न्याय मिलने की उम्मीद की जा सकती है परंतु केवल मंचों से कहना, लोगों को बेवकूफ बनाना, यह सब काफी हो चुका है। अब देश की जनता सच जानना चाहती है कि क्या कट्टर ईमानदार राजनेता और आप पार्टी सच में भ्रष्टाचार में डूबी हुई है या उन्हें फंसाया जा रहा है । जो भी हो सच सबके सामने आना चाहिए और यदि कोई निर्दोष है तो उसे जेल की सलाखों के पीछे नहीं सार्वजनिक जीवन में होना चाहिए । इसके लिए समय का इंतजार करना होगा।