✍️ टी. सी. ठाकुर
च्वासी क्षेत्र के अराध्य देव व च्वासी क्षेत्र के गढ़पति श्री नाग च्वासी जी का प्राकट्य दिवस हर बर्ष की भान्ति इस वर्ष भी 3 आषाढ़ 17-06-2023 को इनकी जन्म स्थली शगाच में धूमधाम से मनाया गया प्रातःकाल नाग देवता अपने मंदिर से अपनी जन्मस्थली शगाच को निकले करणाल,रणसिंघे,शहनाई,गुज्हु के समवेत स्वरों के साथ च्वासी क्षेत्र की वादियों को गुंजायमान करते हुए शगाच के लिए अपनी प्रजा के सैंकड़ों लोगों के साथ प्रस्थान किया।

डमैहर, शमेहड़, लोहारला की दुर्गम घाटियों, पथरीली-कंटीली पगडंडियों और मौसम के तमाम थपेड़ों को खुशी-खुशी हंसकर झेलते हुए सीधी चढ़ाई पार कर शगाच पहुंचते ही देवता के जन्मोत्सव की सभी परंपराएं विधिवत ढंग से शुरु हुई देवता के प्राक्टय स्थल व झाड़ी पर पहाड़ी गाय का गौमूत्र छिड़ककर इसे पवित्र किया गया।

मान्यता है कि इस झाड़ी के साथ श्री नाग च्वासी सिद्ध महोगी का तादात्मक सम्बन्ध है इस झाड़ी की देवरुप में पूजा होती है देवरथ को इस स्थान पर विराजमान करने से पूर्व इस झाड़ी के पास की भूमि को देसी गाय के गोबर से लीपकर तथा गौमूत्र छिड़ककर पवित्र किया गया फिर देवता के रथ को इस स्थान पर बैठाया गया इस पावन झाड़ी में देवरथ को बैठे देख सभी श्रद्धालु हतप्रभ और आत्म विभोर थे।च्वासी सिद्ध,नाग और लोक के इस अनूठे समावेश वाले जन्मोत्सव में वैदिक पाठ,ग्रह पूजन, हवन, झाड़ा(देव आवाहन) विशेष आकर्षण था जिसमे च्वासी क्षेत्र सहित आम दर्शनार्थियों के कल्याणार्थ देवता ने अपने गूर के माध्यम से आशीर्वाद दिया कुदृष्टि, डाकिनी,शाकिनी,शंखिनी, भूत-प्रेत छाया के प्रभावों को अपनी शक्ति से नष्ट किया।

देववाणी के समय सभी श्रद्धालुओं ने नाग च्वासी और च्वासी सिद्ध जी से मंगलमय जीवन की प्रार्थना कर स्वंय को धन्य किया देवदार के सघन पेडों से घिरे शगाच की यह शांत-एकांत स्थली में झाडियों के मध्य अपने प्राक्टय स्थल में विराजमान सुशोभित देवरथ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते प्रतीत हुए देवरथ को इस रुप में झाड़ी के बीच बैठे देखना भी अपने आप में फरमानंद की अनभूति है शगाच का यह स्थान बहुत ही रमणीय और आध्यात्मिक ऊर्जा से पूर्ण हैमंदिर कीओर जाते समय यहां देवरथ सहित कारकरिदें नाटी के ढाई फेरे देते है पारंपरिक नाटी नृत्य तथा देवरथ नृत्य ने खूब समां बांधा।

सांयकाल को सूर्यास्त के साथ ही श्रद्धालुओं के साथ देवरथ सहित सभ कारदार, ढाढी-बाजगी,रैत-बलैत और श्रद्धालु नीचे की ओर उतरकर महोग कोठी को वापिस लौट आए जहाँ परंपरागत ढंग से देओकरों,युवक और महिला मंडल सदस्यों ने रात्रिभोज किया इस वर्ष क्षेत्र के विभिन्न महिला मण्डलों ने संयुक्त रूप से रात को मंदिर में श्री सत्यनारायण कथा का आयोजन किया लोगों रात को “बेड़”(देवता के शयन से पूर्व का देव आवाहन) क्षेत्रवासियों के आकर्षण का केन्द्र बना।

अगले दिन पुनः प्रातःकालीन रथ स्नान, पूजा अर्चना के बाद देव आवाहन के बाद देवरथ का श्रृंगार हटाकर कोठी मेंआगामी उत्सव तक सुरक्षित रखा गया नाग च्वासी सिद्ध जी च्वासी क्षेत्र की आठ पंचायतों के महाधिपत्ति है इन्हे सुख-समृद्धि, सफलता और समृद्धि के देवता के रुप में पूजा जाता है।
- –टी सी ठाकुर, कारदार च्वासीगढ़
करसोग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश
