Himalayan Digital Media

Himalayan Digital Media

News धर्म-संस्कृति साहित्य

आनी में विचित्र परंपराओं का सिलसिला जारी

👉 13 सितंबर की रात्रि को देअखौल में ठहरेंगे देवता शमशरी महादेव

✍️ छबिन्द्र शर्मा, आनी

आनी क्षेत्र के विभिन्न गाँवों में इन दिनों आराध्य गढ़पति देवता शमशरी महादेव के सत्राला मेले की खूब धूम मची है। बता दें कि देवता शमशरी महादेव सात साल के लम्बे अंतराल के बाद अपने अधिकार क्षेत्र के करीब 33 गाँव के दौरे पर हैं। इस वर्ष देवता का यह दौरा गत 13 अगस्त से शुरू हुआ है. जो विभिन्न गाँव का दौरा कर 21 सितंबर को अपने अंतिम पड़ाव भाटनी भाई पहुंचेंगे. जहाँ देवता के स्वागत में तीन दिन भव्य मेले का आयोजन होगा। 23 सितंबर को देवता 45 दिनों के फेर के बाद अपने देवालय लौटेंगे। खास बात यह कि देवता के इस फेर में लोगों को कई विचित्र परंपराएं भी देखने को मिल रही है. जिन्हें देखकर सभी अचंभित है।

फेर के दौरान कोहिला में जहाँ देवता के रथ पर गडूम्बी नाग का मुहरा लगाया गया और यहाँ देवता उल्टा चलते हुए लोगों को दर्शन देते हैं। वहीं खुन्न क्षेत्र के शगागि गाँव में पधारने पर देवता व देवलुओं पर स्थानीय ग्रामिनोनी द्वारा मिट्टी के ठेलों. बिच्छू बूटी के घास तथा आटे से प्रहार किया गया. जिसमें शमशरी महादेव ने युद्ध में जीत दर्ज की। इसी तरह की विचित्र परंपरा के तहत बुधबार को देवता शमशरी महादेव “बाली बाहन” नामक स्थान पर जायेंगे और यहाँ प्राच्छे के वाहर देअखौल में अपने देवलुओं संग रात्रि विश्राम करेंगे।

इस परंपरा के निर्वहन के लिए खौल की लिपाई गोबर व चिकनी मिट्टी से की गयी है। महादेव पूरे सात वर्ष के उपरांत अपने इस खौल में एक रात्रि के लिए विश्राम करेंगे। सनद रहे शमशरी महादेव अपने अधिकार क्षेत्र के विभिन्न गांवों का दौरा कर रहे हैं। इन गांवों के अधीन पड़ने वाली समस्त भूमि के मालिक शमशरी महादेव रहे हैं। मुजारा कानून के बाद देवता ने अपनी भूमि स्थानीय लोगों अर्थात अपनी प्रजा में वितरित कर दी थी। समय-समय पर देवता अपनी भूमि की निशानदेही करने आते हैं और देवता के मुजारे उनके सम्मान में मेले आयोजन करते हैं।

LEAVE A RESPONSE

Your email address will not be published. Required fields are marked *