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Editorial/सम्पादकीय News धर्म-संस्कृति

भूषण ज्वैलर्स सोलन के मालिक श्री कुलभूषण गुप्ता की पुत्रवधू मीना गुप्ता, रूची गुप्ता और रीमा गुप्ता द्वारा मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में 5.01 लाख रूपये का दान

✍ हितेन्द्र शर्मा

भारतीय संस्कृति में पुरुषार्थचतुष्ट्य को महत्वपूर्ण कहा गया है जिसमें सबसे पहले मनुष्य धार्मिक हो, धार्मिक भावना से वह धन का संग्रह करें। धार्मिक भावना के द्वारा एकत्रित धन से अपनी समस्त कामनाओं को पूर्ण करें तथा निष्काम भाव से कामनाओं को संयमपूर्वक पूर्ण करते हुए अंत में मोक्ष को प्राप्त हो। इस जन्म में और इसके बाद पुनर्जन्म में तथा मुक्ति के लिए धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की धारा निरंतर प्रवाहित होती रहे यही भारतीय संस्कृति का मूल उद्देश्य है।

84 लाख योनियों के बाद मनुष्य का शरीर प्राप्त होना जन्म जन्मांतरों के पुण्य का फल माना जाता है। मनुष्य शरीर मिलने के बाद संसार में रहकर सभी दुखों को भोगते हुए अंततः सुख को प्राप्त करना, मनुष्य जीवन का उद्देश्य माना गया है। भारतीय संस्कृति में विश्वास करने वाला प्रत्येक व्यक्ति यही कामना भी करता है कि जीवन जीने के लिए और जीवन में शिक्षा, व्यापार करने के लिए तथा सभी सुख सुविधाओं को पाने तथा कामनाओं को भोगने के लिए हमारे पास धन संपदा हमेशा पर्याप्त मात्रा में हो हमें किसी प्रकार का अभाव न हो हम दीन हीन होकर किसी के आगे हाथ न फैलाएं। जीवन जीने  के लिए धन सबसे महत्वपूर्ण है। क्योंकि धन से कामनाओं की पूर्ति होती है। धन यदि धार्मिक एवं परोपकार की भावना से कमाया गया हो तो वह धन एक व्यक्ति, एक परिवार के साथ-साथ सारे समाज एवं राष्ट्र का भी पालन करने वाला होता है।

वेद में यह कामना की गई है कि वयं स्याम पतयो रयीणाम् । हम धन और ऐश्वर्यों के स्वामी बनें। हमारे पास धन बहुत हो। परंतु धन केवल अपने स्वार्थ और अपने परिवार के लिए ही नहीं अपितु  समाज की सेवा और सभी के कल्याण के लिए भी धन हो। यही भावना हमारी संस्कृति में दान कहलाती है। शास्त्रों की मर्यादा है कि श्रद्धया देयम् । अर्थात जितनी धन संपत्ति परमात्मा ने हमें प्रदान की है उसका कुछ हिस्सा हम जरूर दान करें। इसलिए कहा जाता है कि

साईं इतना दीजिए जामे कुटुब समाए ।

मैं भी भूखा न रहूं साधु न भूखा जाए ।।

हे परमात्मा हमें इतना धन दो कि मैं और मेरा परिवार कभी भूखे ना रहें और जो हमारे दरवाजे पर आए वह भी कभी भूखा न जाए। हमारे घर से कोई खाली हाथ न लौटे। कोई दीन दुखिया, पीड़ित व्यक्ति कभी भूखा न सोए। कोई भी धन के अभाव में न रहे। हमारे परिवार, समाज में आपदा से पीड़ित कोई ऐसा पीड़ित व्यक्ति हो तो हम अपने धन से उसकी भरपूर सहायता करें।

हमारी संस्कृति में दान की महिमा अपरंपार है। स्वथं  खाने से पहले अग्नि में अर्पित करना, गाय, कुत्ते, कौवे और चींटी को भी भोजन देना अर्थात् सभी प्राणियों के जीवन की चिंता करना, हमारी संस्कृति है। धर्म का अभिप्राय यही है – अपना सुख, अपने परिवार का सुख और उसके साथ-साथ समाज और राष्ट्र तथा सारे विश्व के सुख की कामना करने वाला व्यक्ति एवं परिवार अत्यंत सौभाग्यशाली होता है कि परमात्मा ने उन्हें स्वयं के भोग के लिए और समाज में पीड़ित लोगों के कल्याण हेतु दान करने के लिए धन संपत्ति से संपन्न बनाया है।

आत्मनस्तु कामाय सर्वं प्रियं भवति । यह उपनिषद का वाक्य है। अपने लिए जैसे कोई वस्तु प्रिय होती है वैसे ही सभी के लिए कामना करनी चाहिए। धर्म की परिभाषा में कहा गया है आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत् – अर्थात जो बात हमें अपने लिए अच्छी नहीं लगती है वही बात हम किसी दूसरे के साथ भी न करें। जो व्यवहार हमें अपने लिए सुखकर नहीं लगता है, वैसा व्यवहार हम  दूसरों के साथ भी कभी न करें। हम सभी के साथ प्रेम, दया का व्यवहार करें। सब के सुख-दुख में भागीदार बने और कोई दुखी, पीड़ित, असहाय, निर्धन  बेसहारा है तो  हम उसकी सहायता करें। यह हमारा एक कर्तव्य है।

धन्य है वे लोग जो आपदा की स्थिति में अपने सुख भूलकर औरों के लिए जीते हैं। परमात्मा ने जितना धन-धान्य संपन्नता उनको प्रदान की है। जो लक्ष्मी की कृपा उन पर बरसी है। वह उसके द्वार औरों के लिए भी खोल देते हैं । ऐसा ही एक उदाहरण अभी देखने को मिला है।

हिमाचल प्रदेश में इस बार की बरसात में भयंकर तबाही का मंजर देखने को मिला। हजारों लोगों ने इस त्रासदी को झेला, कहीं घर बह गये। कहीं भूमि का कटाव हो गया । कहीं पशु धन की हानि हो गई। कहीं बाढ़ के पानी में बसें, ट्रक कारें बह गई । कहीं परिवार बाढ़ में खो गए। कहीं मंदिर में पूजा करते-करते भक्तजन मृत्यु को प्राप्त हो गए। बरसात में बादल फटने से भयंकर तबाही तथा बहुत बड़ा नुकसान हुआ। हालांकि इस नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती। क्योंकि जिसकी जान चली गई उसे वापस नहीं लाया जा सकता है। परंतु जो शोक संतप्त, दुखी,बेसहारा, निर्धन साधनहीन लोग हैं, जिनके पास जीने के लिए कोई सहारा नहीं बचा है, पैसा  रोजगार कुछ  नहीं है, उनकी सरकार भी सहायता कर रही है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू पूरा प्रयास कर रहे हैं कि सरकार के उपलब्ध संसाधनों  से उन पीड़ित लोगों की सहायता की जाए उन्होंने अपनी ओर से व्यक्तिगत तौर पर भी 51 लाख की राशि आपदा राहत कोष के लिए भेंट करके एक अच्छी मिसाल कायम की है।  केंद्र सरकार ने भी कुछ धन देकर प्रदेश के इस संकट में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। इसके इलावा अनेक सामाजिक संस्थाओं और  दानी व्यक्तियों ने भी आपदा की इस घड़ी में बढ़-चढ़कर के दान दिया है। किसी ने अन्न, किसी ने कंबल, किसी ने घर का कोई सामान, तो किसी ने धन देकर के यथायोग्य सहायता की है। 

हिमाचल प्रदेश में आपदा राहत कोष में दान के लिए मुख्यमंत्री की अपील पर भूषण ज्वेलर्स कैसे पीछे रह सकता है, जो हिमाचल प्रदेश में विभिन्न संस्थाओं,  छोटे-मोटे व्यापार के कार्यों के लिए विज्ञापनों के माध्यम से सहायता करता है। भूषण ज्वेलर्स हिमाचल प्रदेश में एक ऐसा नाम है जिसके विज्ञापनों में से प्राप्त दान की राशि से अनेकों समाचार पत्र, वेबसाइट और डिजिटल चैनल चल पा रहे हैं।  वे प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप में हजारों लोगों को रोजगार देने सहायता कर रहे हैं।

अभी एक कार्यक्रम में जब हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा भूषण ज्वेलर्स के मालिक श्री कुलभूषण गुप्ता तथा उनके परिवार जनों से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए दान करने की  अपील पर कुलभूषण गुप्ता जी की पुत्रवधू मीना गुप्ता, रूची गुप्ता और रीमा गुप्ता ने अपने दो महीने के वेतन की राशि 501000 मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करके एक उदाहरण पेश किया है। इस प्रकार भूषण ज्वेलर्स परिवार की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में राशि प्राप्त हुई है।

जिस प्रदेश में कुलभूषण गुप्ता और उनकी पुत्रवधू मीना गुप्ता, रूची गुप्ता और रीमा गुप्ता जैसे धनसंपन्न व्यक्ति मौजूद हैं, और जो हमेशा दीन दुखियों की सेवा करने के लिए समर्पित रहते हैं वहां कोई भी अभाव में नहीं रह सकता है। वे अपने दान से निस्वार्थ भाव से सभी पीड़ितों की सेवा करते हुए उनके दुख दर्द को बांटने के लिए हमेशा सबके साथ खड़े रहते हैं। परमात्मा कुलभूषण गुप्ता जी को और उनके सभी परिवार जनों को अपार धन-धन्य, वैभव संपन्नता प्रदान करें और उन सभी के अंदर दान करने की यह भावना सदैव बनी रहे ताकि वे साधनहीन अभावग्रस्त गरीब, दिन दुखी लोगों की सेवा के लिए हमेशा उपस्थित रह सकें ताकि सभी का कल्याण हो।

हिमालय डिजिटल मीडिया की ओर से श्री कुलभूषण गुप्ता उनकी पुत्रवधू मीना गुप्ता, रूची गुप्ता और रीमा गुप्ता जी तथा सभी परिवार जनों को इस पुण्य कर्म के लिए अनंत हार्दिक शुभकामनाएं।

✍ हितेन्द्र शर्मा

कुमारसैन, जिला शिमला, हि.प्र.

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