मई 1988 में हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी में अनुसंधान सहायक प्रकाशन के पद पर नियुक्त होने का अवसर मिला। इस समय डॉक्टर बंशीराम शर्मा अकादमी सचिव, श्री एस एन जोशी निदेशक भाषा संस्कृति और श्री एमके काव सचिव भाषा संस्कृति हिमाचल प्रदेश सरकार तथा अध्यक्ष श्री वीरभद्र सिंह माननीय मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश रहे। 34 वर्ष की सेवा अवधि में बहुत उतार-चढ़ाव देखे। खट्टे मीठे कई तरह के अनुभव रहे। डॉक्टर बंशी राम शर्मा , सुदर्शन वशिष्ठ, जगदीश शर्मा से काफी कुछ सीखने को मिला। संस्कृत अर्धवार्षिक पत्रिका श्यामला के प्रारंभिक अंकों का संपादन प्रकाशन किया। हिंदी शोध पत्रिका सोमसी और पहाड़ी हिमभारती के भी काफी अंक संपादित किए। इसके अतिरिक्त हिंदी अंग्रेजी पहाड़ी संस्कृत उर्दू भाषाओं में भी लगभग 50 से अधिक पुस्तकों का संकलन संपादन मुद्रण एवं प्रकाशन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जून 2017 में मुझे सचिव अकादमी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया। तब से लेकर दिसंबर 2022 तक सचिव के दायित्वों का निर्वहन करते हुए हिमाचल प्रदेश के लेखकों कलाकारों के प्रोत्साहन और सम्मान के लिए प्रयासरत रहा। इस अवधि में पुस्तक की थोक खरीद, साहित्यिक पत्रिकाओं को अनुदान, स्वैच्छिक संस्थाओं को अनुदान, सेमिनार , कवि सम्मेलन, कार्यशाला, साहित्य कार्यक्रमों का आयोजन किया। संस्थाओं के सहयोग से अनेक कार्यक्रम सफल रुप से संचालित हुए। केंद्रीय संगीत एवं नाटक अकादमी के द्वारा आयोजित देशज कार्यक्रमों में अकादमी की भागीदारी रही। एनबीटी और ओकार्ड द्वारा आयोजित पुस्तक मेलों में अकादमी की सक्रिय भागीदारी रही। इन मेलों के दौरान अकादमी द्वारा हर रोज साहित्य कार्यक्रमों का आयोजन भी होता रहा जिसमें हिमाचल प्रदेश के लेखकों को मंच मिला।
कार्यकाल में युवाओं को प्रोत्साहन देने के लिए स्कूलों कॉलेजों विश्वविद्यालयों में भी अनेक कार्यक्रम आयोजित हुए और बहुत सारे नवोदित लेखकों कवियों को मंच मिला।कोरोना काल में साहित्य कला संवाद का प्रारंभ हुआ। वर्षों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में लगभग 772 एपिसोड लाइव प्रसारित किए गए जिसमें देश-विदेश के विभिन्न लेखकों कलाकारों समाजसेवियों ने सक्रियता से भाग लिया। कोरोना काल के दौरान अकादमी द्वारा विभिन्न जयंती समारोह तथा ऑनलाइन कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। अकादमी द्वारा संचालित लाइव कार्यक्रमों का फेसबुक और यूट्यूब पर हर रोज प्रसारण करने में श्री हितेंद्र शर्मा का अत्यधिक सहयोग रहा। उन्हीं के कठोर परिश्रम मेहनत और साहित्य कला संस्कृति के प्रति निस्वार्थ सेवाभाव के कारण यह कार्यक्रम देश विदेशों में सफल रहा और अनेक सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाओं ने साहित्य कला संवाद कार्यक्रम की तर्ज पर अपने अपने कार्यक्रम भी संचालित किए। इन कार्यक्रमों के संचालन में दक्षा शर्मा, कृष्ण मोहन पांडे, चंद्रकांता, कल्पना गांगटा, दीप्ति सारस्वत तथा अन्य सभी प्रतिभागी साहित्यकारों कलाकारों का सक्रिय सहयोग प्राप्त होता रहा है। अकादमी द्वारा सरकार से विशेष अनुदान प्राप्त होने पर अकादमी पुस्तकालय और राज्य संग्रहालय का डिजिटाइजेशन करके डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। इस कार्यकाल में के आर भारती की हिस्ट्री ऑफ हिमाचल, डॉ कर्म सिंह द्वारा संपादित हिमाचल लोक रामायण, डॉ. ओम प्रकाश शर्मा द्वारा लिखित हिमाचल प्रदेश संस्कृत साहित्य का इतिहास और हिमाचल लिपि माला, डॉ राजेंद्र की पुस्तक पांगी कस्टमरी ला तथा डॉक्टर सरिता वर्मा की कल्चरल हेरिटेज ऑफ शिलाई, और डॉ कर्म सिंह द्वारा संपादित नव संवत्सर परंपरा आदि पुस्तकों का भी प्रकाशन हुआ। हाल ही में डॉ प्रियंका वैद्य द्वारा अंग्रेजी में संकलित तथा संपादित पुस्तक हॉटू और कार्निवल ऑफ स्टोरीज का भी प्रकाशन किया गया जो कि इस तरह का पहला प्रयास है।
अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तक हिमाचल लिपि माला को संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया जाना अकादमी के इस प्रयास को गौरव प्रदान करता है। अकादमी द्वारा विगत वर्षों में तैयार की गई डॉक्यूमेंटरीज को संपादित करके यूट्यूब और फेसबुक पर ऑनलाइन किया गया। अकादमी के साहित्य पुरस्कारों शिखर सम्मान, कला सामान, संस्था सम्मान का वितरण और उन्हें अपडेट किया जाना अकादमी की एक उपलब्धि रही।श्री राकेश कंवर सचिव भाषा संस्कृति के मार्गदर्शन में डॉ पंकज ललित निदेशक भाषा संस्कृति द्वारा अकादमी के माध्यम से संचालित किताब घर शिमला की स्थापना और हिमाचली लेखकों की पुस्तकों का विक्रय अपनी तरह का एक पहला तथा सफल प्रयास हैमुझे सचिव अकादमी का यह दायित्व निभाने में अकादमी के सदस्यों डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, डॉ. इंद्र सिंह ठाकुर, डॉ. नंदलाल ठाकुर, डॉ रीता सिंह, श्रीमती भारती कुठियाला, श्री के आर भारती और प्रदेश के लेखकों कलाकारों और संस्थाओं का भरपूर सहयोग मिला। सचिव अकादमी के तौर पर इस कार्यकाल के दौरान माननीय अध्यक्ष श्री जयराम ठाकुर पूर्व मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश और भाषा संस्कृति मंत्री श्री गोविंद ठाकुर कथा पूर्व मुख्य सचिव श्री आईडी धीमान और वर्तमान सचिव भाषा संस्कृति हिमाचल प्रदेश सरकार श्री राकेश कंवर जी तथा निदेशक भाषा संस्कृति डॉ पंकज ललित जी का आशीर्वाद मार्गदर्शन और सहयोग निरंतर मिलता रहा जिससे अकादमी कार्य कर सकी है।
हिमाचल प्रदेश के अधिकांश लेखकों साहित्यकारों ने अकादमी का और व्यक्तिगत तौर पर मेरा भरपूर सहयोग किया है इसके लिए मैं सभी का हृदय से सभी का आभारी हूं। मैं यह स्वीकार करता हूं कि जाने अनजाने में कुछ भूले अवश्य हुई होंगी उसके लिए मैं सभी से क्षमा याचना करना चाहता हूं और जो कुछ अच्छा हो पाया है उस सब का श्रेय भी आप सभी को देना चाहता हूं क्योंकि इन उपलब्धियों में आप सबका बराबर सहयोग रहा है।
धन्यवाद
– डाॅ. कर्म सिंह