संसार में जितना भी ज्ञान है, बड़े–बड़े सिद्धान्त, शब्दकोश, नियम, वैज्ञानिक आविष्कार इत्यादि का मूल क्या है? ये सब कुछ कैसे उपलब्ध हुआ? अब इसके उत्तर में साधारण रूप से यही कहा जाएगा कि विभिन्न विषयों का गहन अध्ययन किया गया या शोध किया गया धीरे–धीरे विकास की गति तीव्र होती गई और ज्ञान का संग्रह होता गया। लेकिन सर्वप्रथम ज्ञान की उत्पत्ति अनुभव से ही हुई। पुस्तकीय ज्ञान तो बहुत बाद में आया। अनुभव जन्य ज्ञान को ही लिपिबद्ध किया गया व उसका पठन–पाठन करवाया गया। प्राचीन मनीषियों ने जो अनुभव किया होगा उसे भली–भांति शोध कर सिद्धान्त बनाए होंगे और वही सिद्धान्त पुस्तकों में अग्रिम पीढ़ियों को पढ़ाए जाने के लिए तैयार किए गए। अत: सिद्ध है कि ज्ञान का उद्गम अनुभव से हुआ।
अत: ये बुजुर्ग–वृद्ध लोग चलती फिरती पुस्तकें हैं। क्योंकि उनके पास अनुभव बाहुल्य है। उनके पास अनुभव की मात्रा अधिक है, जबकि शिक्षित वयस्कों–युवाओं के पास सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान है और अनुभव की न्यूनता है। अत: वे वृद्ध लोग जो कभी विद्यालय में नहीं गए वे भी जीवन से संबंधित व व्यावहारिक विषयों का भरपूर ज्ञान रखते हैं। समय मिलने पर उनके साथ अवश्य बैठना चाहिए और व्यावहारिक विषयों पर चर्चा करनी चाहिए।
जहां व्यावहारिक विषयों की सटीक जानकारी मिलेगी वहीं नवीन ज्ञान व नवीन विधि की जानकारी भी मिल सकती है। अत: ये वृद्ध लोग आयु में वृद्ध होने के साथ–साथ ज्ञान वृद्ध भी हैं क्योंकि अनुभव की मात्रा उनके पास अधिक है इसलिए अनुभव बाहुल्य होने के कारण उनमें अनुभवजन्यज्ञान की भी बहुलता है।
लेखक — शिवकुमार शर्मा “शिवा”
✍️ हिन्दी व संस्कृत साहित्यकार