✍️ पवन शर्मा
बहुत दिनों से कुछ लिखा नही कारण समय का अभाव और दूसरा कुछ सार्थक विचार, बस लिखने के लिए कुछ लिखना मेरे लिए मुश्किल है। लेकिन बहुत दिनों से मंडी के हिमाचल गौरव पुरस्कार से सम्मानित बीरबल शर्मा द्वारा बनाई गई एक मात्र हिमाचल फोटो आर्ट गैलरी को दूसरी बार डेवलपमेंट के नाम पर उजाडने की कोशिश की जा रही है ये बहुत ही निंदनीय है। एक अकेले आदमी ने वो कर दिखाया है जो कला और संस्कृति के नाम पर हर साल करोड़ो, अरबों रुपये खर्च कर रहे है लेकिन कुछ नतीजा सामने नही आता बस मीटिंगे और बड़े बड़े होर्डिग लगा कर के कला और संस्कृति के नाम पर मूर्ख बना रहे। अब एक योद्धा बीरबल शर्मा अपने प्रदेश की कला संस्कृति और सुंदरता के पीछे पागल हो कर सालों से किसी भी मौसम में पैदल यात्रा कर कर के अपने कमरे से लगातार क्लिक क्लिक करता चित्रित करता एक ऐसी फोटो गैलरी का रूप देता है जो हिमाचल में ही नही पूरे भारत मे एक ऐसा संग्रह बना देता है जिसे विदेशी और यहाँ तक कि हिमाचली भी ये पूछने पर मजबूर हो जाते है कि ये कहां का दृश्य है हमने तो नही देखा।
लेकिन शायद यही बात राजनिति और अफसर शाही को पसंद नही आ रही कि जो काम सरकार और तंत्र नही कर पा रहा वो एक आम आदमी कैसे कर सकता है । अगर अपनी कला और संस्कृति को लेकर सब इतने जागरूक हो जायेगे तो ये जो कला के नाम पर सरकारी विभाग बनाये है उन की कोई महत्व या सही शब्दो मे इज्जत नही रह जायेगी इस लिए इसे मिटा दिया जाए ताकि आगे कोई ऐसी हिम्मत न करे। अगर यही गैलरी की जगह कीसी नेता या पहूच वाले व्यक्ति की होती तो रास्ता आराम से बदल दिया जाता । लेकिन ये तो एक कलाकार का है इस को जड़ से मिटा देना ही ठीक है। प्रदेश की डेवलपमेंट कला और संस्कृति की धरोहर को मिटा कर नही हो सकती। समय रहते सरकार और उच्च अधिकारियों को सोच कर इस फोटो गैलरी को बचाना चाहिए और मुद्दे पर सभी को अपने आपस की गिले शिकवे मिटा कर एक हो कर उस फोटो गैलरी को बचाने की कोशिश करनी होगी।
अब ये सिर्फ बीरबल शर्मा की ही नही हम सम हिमाचलियों की शान है। कलाकारों किसी विशेष राजनीति से समंध नही रखते उसे तो जो अच्छा कर रहा है उस की तारीफ करनी है और जो गलत हो रहा है उस पर सवाल खड़ा करना है। मेने बीरबल शर्मा जी को बचपन से देखा है कैसे एक फोटोग्राफर प्रदेश का नामी न्यूज़ रिपोर्ट बना लेकिन अपने कलाकार को हमेशा तराशता गया। हिमाचल के दुर्गम इलाके के दुर्लभ फोटो से एक एतिहासिक गेलरी का रूप दिया। जो एक बार प्रदेश की डेवलपमेंट के नाम पर शिकार हुई। और आज फिर वही खेल खेला जा रहा है। अब सवाल ये है कि इस को उजाडने के सिवाए क्या कोई रास्ता नही है? रास्ता तो निकलेगा बस निकालने की जरूरत है। ये गैलरी अब सिर्फ बीरबल जी की नही है। उन सब की है जो कला ,संस्कृति और हिमाचल को प्यार करते है।हम सब मिल कर इस को बचाने के लिए एक होकर आवाज उठाये।
पवन कुमार शर्मा
निर्देशक (फ़िल्म ब्रिना, करीम मोहमद, वन रक्षक)