प्रशिक्षक डॉ मनोज शैल ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता ही एक ऐसा ग्रन्थ है जिसमें सृष्टि के सम्पूर्ण आध्यात्मिक पक्षों का समावेश है, जिनको पूर्ण रूप से समझ लेने पर भारतीय चिन्तन का समस्त सार ज्ञात हो सकता है। श्रीमद्भगवद्गीता ग्रन्थ को ‘प्रस्थानत्रय’ माना जाता है। ‘उपनिषद्’ अधिकारी मनुष्यों के काम की चीज है और ‘ब्रह्मसूत्र’ विद्वानों के काम की, परन्तु श्रीमदभगवद्गीता सभी के काम की चीज है।ध्यातव्य है कि सोमवार को इस कार्यशाला का समापन होगा। जिसमें बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा तथा छात्रों की श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकोच्चारण की प्रतियोगिता करवाई जायेगी। समापन समारोह में मुख्य रूप से प्रो. लेखराम शर्मा पूर्वविभागाध्यक्ष गुरुनानकदेव विश्वविद्यालय अमृतसर तथा रेवती सैणी जिलाभाषाधिकारी बिलासपुर उपस्थित रहेंगे।
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