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Editorial/सम्पादकीय

किताब घर शिमला

✍️ हितेन्द्र शर्मा

हिमाचल प्रदेश के लेखकों की पुस्तकों की प्रदर्शनी तथा पाठकों को साहित्य उपलब्ध करवाने के लिए विगत वर्ष गेयटी थिएटर शिमला में किताब घर प्रारंभ किया गया जिसका उद्घाटन राकेश कंवर सचिव भाषा संस्कृति हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा किया गया। शिमला किताब घर का संचालन भाषा संस्कृति विभाग तथा हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है और स्थान गेयटी थियेटर सोसाइटी शिमला की ओर से निशुल्क उपलब्ध करवाया गया है। शिमला किताब घर प्रतिदिन सायं दो से सात बजे तक खुला रहता है। इसमें लगभग दो सौ हिमाचली साहित्यकारों की पुस्तकें हिंदी, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी और पहाड़ी भाषाओं में विक्रय के लिए उपलब्ध हैं। शिमला किताब घर में पुस्तकप्रेमी पर्यटकों तथा पाठकों द्वारा पुस्तकें खरीदी जाती हैं। पुस्तकों के विक्रय की राशि हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के माध्यम से लेखकों को प्रति माह प्रदान की जा रही है। अब तक लगभग ₹ पांच लाख की पुस्तकों का विक्रय हो चुका है तथा इस राशि की अदायगी पुस्तकों के लेखकों को की जा चुकी है।

पर्यटकों एवं साहित्यकारो ने बताया कि शिमला किताब घर देश भर में अपनी तरह का एक सफल सार्थक और महत्वपूर्ण प्रयास है, जहां हिमाचल के सभी लेखकों की पुस्तकें प्रदर्शनी और विक्रय के लिए एक छत के नीचे उपलब्ध हैं। यहां सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकारों से लेकर युवा नवोदित लेखकों की पुस्तकें भी देखी जा सकती हैं। इस के साथ-साथ हंस , बिपाशा, सोमसी, कथादेश, पहल आदि साहित्यिक पत्रिकाएं भी यहां रखी गई हैं। अधिकांश लेखकों का कहना है कि हिमाचली लेखकों की पुस्तकों का एक जगह प्रदर्शित किया जाना अपने आप में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जहां एक दूसरे की पुस्तकों को पढ़ा जा सकता है , खरीदा जा सकता है। इससे लेखकों को भी अवश्य प्रोत्साहन मिल सकेगा।

हिमाचल प्रदेश के प्रख्यात लेखक कथाकार एवं उपन्यासकार एस आर हरनोट का कथन है कि शिमला किताब घर की स्थापना करके सरकार ने लेखकों की लंबे अरसे से चली आ रही मांग को पूरा किया है। इसी तर्ज पर शिमला में बुक कैफे भी खोलने के प्रयास किए जाने चाहिए ताकि शिमला के अन्य स्थानों पर भी पुस्तकें पाठकों को उपलब्ध हो सकें। यहां लेखकों के लिए भी बैठने का एक छोटा सा स्थान चिन्हित किया गया है, जो एक अच्छा प्रयास है। इसी बहाने प्रदेश के बाहर से आने वाले नामी-गिरामी लेखकों के साथ बैठकर के हिमाचली लेखकों का भी मिलना हो पाता है ,जो साहित्यिक विचारों के आदान-प्रदान तथा संवाद के लिए एक अच्छा माहौल उपलब्ध करवाता है।

चर्चित लेखिका एवं कवयित्री दीप्तीे सारस्वत ने बताया कि बतौर एक लेखिका उन्हें गेयटी थिएटर के किताब घर में अपनी पुस्तक को विक्रय के लिए रखा हुआ देखकर मन में प्रसन्नता होती है और जब कोई पाठक पुस्तक खरीदता है और अकादमी के माध्यम से उसकी राशि प्राप्त होती है तो मन में प्रसन्नता उनको होना स्वाभाविक ही है। यह भी एक सम्मान की बात है। हां, लेखकों को अपनी पुस्तकें प्रकाशित करने और विक्रय के साथ-साथ अन्य लेखकों की पुस्तकों को भी पढ़ने को प्राथमिकता प्रदान करनी होगी ताकि इस आदान-प्रदान से भी उसका अधिक प्रचार-प्रसार हो सके और हम लेखक एक दूसरे के लेखन से भी परिचित हो सकें।

नवोदित कवियित्री कविता भारद्वाज का बयान है कि किताब घर के माध्यम से नए लेखकों को भी सम्मान दिया जा रहा है । वरिष्ठ लेखक और पर्यटक जब उनकी पुस्तकों को टटोलते हैं, पलटते हैं और खरीदते हैं तथा उसकी राशि लेखक को मिलती है तो उस प्रसन्नता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। यह चलन और बढ़ता रहना चाहिए।

संस्कृत के विद्वान आचार्य मस्तराम के अनुसार यह एक अच्छा प्रयास है और शिमला शहर में पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नगर निगम के माध्यम से भी कुछ प्रयास किए जा रहे हैं ताकि विभिन्न स्थानों पर उसका ले और बुक कैसे खोलकर वरिष्ठ नागरिकों युवाओं और महिलाओं को भी पुस्तकें पढ़ने के लिए उपलब्ध करवाई जा सकें।

डॉ पंकज ललित निदेशक भाषा संस्कृति विभाग एवं सचिव हिमाचल अकादमी ने बताया कि किताब घर में बाहर से आने वाले पर्यटक और अन्य राज्यों के लेखक निरंतर किताब घर में आ रहे हैं। किताबें खरीदी जा रही हैं। जिसकी राशि सीधी लेखकों तक पहुंच रही है। इस दृष्टि से जहां हिमाचल प्रदेश के लेखकों को उनकी पुस्तकों को प्रदर्शित करने के लिए एक स्थान उपलब्ध हो सका है वहां उनको पुस्तकों के विक्रय की राशि भी समय पर उपलब्ध करवाई जा रही है ताकि उन्हें उचित सम्मान और प्रोत्साहन मिल सके। हिमाचल प्रदेश के लेखकों के साथ-साथ राज्य संग्रहालय और हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी की पुस्तकें तथा पत्रिकाएं तथा पहाड़ी चित्रकला के प्रिंट और हम राहुल सांकृत्यायन निर्मल वर्मा आदि प्रख्यात लेखकों की हिमाचल प्रदेश से संबंधित पुस्तकें भी किताब घर में विक्रय के लिए शामिल की गई है।

✍️ हितेन्द्र शर्मा

कुमारसैन, जिला शिमला

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