👉 वन में गुर्जर समुदाय के पास स्थायी निर्माण का नही कोई अधिकार, केवल मवेशियों को चराने की अनुमति
हितेन्द्र शर्मा, कुमारसैन
नारकण्डा के समीप छीछड़ के सरा-थाच क्षेत्र में मजार/मज्जिद के निर्माण का दावा करते हुए एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। देरठु माता मंदिर के साथ लगते मैदान में अवैध मजार के निर्माण की सूचना मिलते ही कुमारसैन वन परिक्षेत्र के अधिकारीयों ने वन क्षेत्र के कर्मचारियों से मामले की पूछताछ और साइट का दौरा किया और पाया कि ऐसी कोई निर्माण गतिविधि नहीं की जा रही है जैसा कि वीडियो और वायरल व्हाट्सएप संदेशों में दावा किया गया है।
उप वन संरक्षक यशु दीप सिंह, आईएफएस वन मंडल कोटगढ़ ने जानकारी देते हुए बताया कि मुस्लिम गुर्जर हर साल गर्मियों के मौसम में अस्थायी रूप से केवल अपने मवेशियों को चराने के लिए निचले मैदानों से उच्च ऊंचाई वाले घास के मैदानों में प्रवास करते हैं और पिछले कई वर्षों से वन विभाग द्वारा चराई परमिट दिए जा रहे हैं। अनुमतियाँ राष्ट्रीय चरागाह नीति एवं हिमाचल प्रदेश की राज्य स्तरीय चरागाह सलाहकार समिति द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में प्रदान की जा रही हैं।

वन में गुर्जर समुदाय के पास केवल चराई का अधिकार है और वन भूमि में किसी भी स्थायी संरचना के निर्माण के लिए ऐसा कोई अधिकार उन्हें नहीं दिया गया है। अधोहस्ताक्षरी ने मोहम्मद आलम नाम के व्यक्ति से भी मुलाकात की जिसके नाम पर चराई अनुज्ञा पत्र जारी किया गया था तथा परमिट धारक एवं वन अमले दोनों को निर्देशित किया कि परमिट धारक द्वारा किसी भी प्रकार का कोई निर्माण कार्य नहीं कराया जाना सुनिश्चित करें, अन्यथा वन कानूनों के अनुसार कार्यवाही की जायेगी।