✍️ डॉ. कर्म सिंह आर्य
हम गुलाम पैदा हुए हैं परंतु मरेंगे आजाद होकर
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा
कदम कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा यह जिंदगी है कौम की कौम पर लुटाए जा
क्रांतिकारी विचारों को जन्म देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक ऐसा संघर्षशील, क्रांतिकारी ,राष्ट्रभक्त नेता थे जिन्होंने आईपीएस की नौकरी को ठुकरा कर राष्ट्रप्रेम की ज्योति को प्रचंड किया और अपना तन मन धन सर्वस्व न्योछावर कर दिया। राष्ट्र की सेवा के लिए उनका केवल एक ही मकसद था भारत की आजादी। पहले देश में और उसके बाद विदेशों में अगर किसी महान व्यक्ति ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सफल नेतृत्व किया है तो उसका एकमात्र श्रेय सुभाष चंद्र बोस को जाता है।
सुभाष चंद्र बोस एक ऐसे महान नेता थे जिन्होंने महात्मा गांधी द्वारा समर्थित पट्टामिसीता रमैया को पराजित किया और कांग्रेस के अध्यक्ष बने परंतु सुभाष की जीत को मोहनदास करमचंद गांधी ने अपनी हार मान लिया और उनको त्यागपत्र देने के लिए मजबूर किया। नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने महात्मा गांधी का सम्मान रखने के लिए कांग्रेस के अध्यक्ष पद को भी छोड़ दिया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस वैचारिक क्रांति के साथ-साथ सशस्त्र संघर्ष को भी आवश्यक मानते थे और इसी बात पर उनका महात्मा गांधी से विरोध रहा।
सुभाष चंद्र बोस ने आजादी के लिए आजाद हिंद फौज का गठन किया। आजाद हिंद फौज के माध्यम से पूरे भारतवर्ष में और विदेशों में भी भारत की स्वतंत्रता की मुहिम का संचालन किया। वे आजाद हिंद रेडियो के माध्यम से भी अपना संदेश निरंतर लोगों तक पहुंचाते रहे। उनके नेतृत्व में भारतीय वीर वीरांगनाओं ने आजाद हिंद फौज में भर्ती होकर देश के लिए अप्रतिम बलिदान दिए। सुभाष चंद्र बोस ने हिटलर जैसे महान नेता को भी अपने व्यक्तित्व से प्रभावित किया और वे विदेशी ताकतों से भी सहयोग लेने में सफल रहे। उन्होंने विदेशों में और भारत में भी समान रूप से स्वतंत्रता आंदोलन की गति को बनाए रखा और अंततः भारत स्वाधीन हुआ।
ऐतिहासिक घटनाओं के आधार पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे और उनकी अंतिम सरकार को कुछ देशों द्वारा भी मान्यता प्रदान की गई थी परंतु इस बात को भारत की राजनीति और इतिहास में अधिक महत्व नहीं दिया गया और बाद के भारतीय शासको ने सुभाष चंद्र बोस को हास्य तक सीमित कर दिया।
भारत की स्वतंत्रता से पूर्व ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस को एक विमान दुर्घटना में शहीद बताया गया और वे आजाद हिंद की सरकार में न तो शामिल हो पाए और न ही स्वतंत्र भारत के विकास में अपना योगदान दे पाए परंतु उनकी विचारधारा भारतीय जनमानस को गहरे प्रभावित करती रही।
सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु अभी तक एक रहस्य बनी हुई है हालांकि भारत सरकार द्वारा इन वर्षों में कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने के उपरांत उनके संघर्षपूर्ण व्यक्तित्व के कई रहस्य सामने आ सके हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक शिक्षित स्वस्थ आत्मनिर्भर शक्तिशाली भारत का निर्माण करना चाहते थे और इसी भावना से उन्होंने सर्वोच्च बलिदान भी प्रदान किया। आज भी उनके विचारों, उनकी शहादत और उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए देश को आगे बढ़ने का एक सुदृढ़ संकल्प लिए जाने की आवश्यकता है ताकि भारत के प्रत्येक नागरिक में राष्ट्रभक्ति की भावना का संचार हो सके।
✍️ डॉ. कर्म सिंह आर्य, शिमला