चुनाव होने को थे, पक्ष और विपक्ष में विभिन्न मुद्दों को लेकर खींचतान जारी थी। मीडिया के लोग अपने-अपने चहेतों के लिए आवाज बुलंद करने लगे थे। विपक्ष और सत्ता पक्ष में जोर आजमाइश का दौर शुरू हो चुका था। जनता हमेशा की तरह तमाशबीन बनकर सबको पैनी नजर से देख परख रही थी। अचानक एक पुरानी घटना से विपक्ष को हल्ला मचाने का मौका मिल गया और सभा में उसी मुद्दे पर चर्चा कराने तथा सत्तापक्ष के राजा का विचार जानने के लिए सभी लामबंद हो गए। कुछ सोच विचार के बाद सत्ता पक्ष ने भी इस मुद्दे पर बहस करने को हामी भर दी परंतु विपक्ष इसके लिए भी तैयार न हुआ। विपक्षी खेमे के और एक निरंकुश राजा को बचाने के लिए विपक्ष ने कई दांव आजमाएं और सत्तापक्ष को विचलित करने का प्रयास किया परंतु यहां भी विपक्ष को मुंह की खानी पड़ी और वह अपने निरंकुश राजा को बचा नहीं पाए।
दूसरा अहम मुद्दा विपक्ष का था अपने युवराज को राजा के चुनाव के लिए सभा में लांच करना और इसके लिए चारों तरफ ऐसा भ्रम जाल फैलाया गया कि जब युवराज बोलेंगे, सभा में अपनी बात रखेंगे तो भूकंप आ जाएगा और सत्तापक्ष का राजा उसके साथ आंख में आंख मिला कर बात करने की हिम्मत नहीं कर पाएगा। निश्चित समय पर युवराज को अपनी बात कहने का मौका मिला परंतु इस बार युवराज के तेवर पहले से भी कहीं ढीले थे। इधर उधर की बात करते हुए भाषण तो हो गया परंतु कोई ऐसा दमदार मुद्दा सामने नहीं आया जो सारे विपक्षी दलों के सामंतों को एकजुट कर सकता। जनता को भी युवराज से जो उम्मीद बंधी थी वह धरी की धरी रह गई और विपक्ष की सजी सजाई फील्डिंग पर सत्ता पक्ष को धुआंधार बैटिंग करने का मौका मिल गया। सत्तापक्ष ने पूरी योजना के साथ अपने तेजतर्रार मंत्रियों को मैदान में उतारा, सभी ने अपने अपने विषयों को पूरे दमखम के साथ पेश किया। सत्ता पक्ष के तंज पर विपक्ष बीच-बीच में खूब हो हल्ला करता रहा और सत्तापक्ष के राजा को एक ही घटना पर अपना भाषण देने के लिए चिल्लाता रहा।

सत्ता पक्ष के एक वरिष्ठ काबीना मंत्री ने उस घटना के पीछे के इतिहास और राजनीति का कच्चा चिट्ठा प्रमाणिक तत्वों के आधार पर खोल कर सामने रख दिया और उसे दो समुदायों के अनेक वर्षों के संघर्ष का परिणाम बताया तथा इस संघर्ष की पृष्ठभूमि में विपक्ष की राष्ट्र विरोधी नीति तथा असफलता को भी सामने लाया। सत्तापक्ष सभा को यह विश्वास दिलाने में कामयाब रहा कि यह घटना मात्र कोई संयोग नहीं परंतु जिस तरह से इसको उछाला गया वह देश की एकता एवं अखंडता के लिए अच्छा नहीं है। यह वक्त देश को एकजुट करके विकास के मार्ग पर आगे ले जाने का है और उसके लिए सत्तापक्ष पूरी तरह से समर्पित भाव से अपना कर्तव्य निभा रहा है। अंत में सत्ता पक्ष के मुख्य शासक के बोलने की बारी आई तो सारी सभा उन्हें शांत भाव से सुनने लगी। क्योंकि यह सभा विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर थी जिसका सत्ता पक्ष के मंत्रियों के बयानों के बाद राजा को विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर अपनी बात कहनी थी और उसके बाद संख्या बल के आधार पर वोटों के द्वारा जय पराजय का निर्णय होना था।
सत्ता पक्ष के राजा ने एक एक बिंदु पर विस्तार से बात की, अपनी सरकार की उपलब्धियों का बखान किया जिसका सत्ता पक्ष के सदस्यों ने पुरजोर समर्थन किया परंतु विपक्ष को उनकी यह बातें रास नहीं आई और वे अकेले उसी दुर्घटना पर उनका बयान दिए जाने की मांग करते रहे। राजा ने अपने लंबे भाषण में देश के इतिहास संस्कृति परंपरा और सरकार के विकास कार्यों का लेखा जोखा प्रस्तुत किया। गया सत्ता पक्ष ने खूब तालियां बजाकर राजा की हर बात का समर्थन किया और विपक्ष को धराशाई करने में अपना भी समर्थन जताया। सत्ता पक्ष की दलीलों से विपक्ष सभा में अपने आप को असहज महसूस करने लगा तो अपने नेता के इशारे पर सभी विपक्षी दल के सभा से सदस्य बाहर निकल गए। इधर राजा ने उस बहुचर्चित घटना पर अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि देश के किसी भी कोने में, किसी भी महिला, किसी भी नागरिक का अपमान होना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है और पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए सत्ता पक्ष पुरी तनमययता से कार्य कर रहा है और यह सरकार की गारंटी है कि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाएं ना हों, ऐसा प्रयास किया जाएगा। अब तक विपक्ष सभा से भाग चुका था और सत्ता पक्ष अपने राजा की बातों का मेजर थपथपा कर भरपूर समर्थन कर रहा था। सभा समाप्त हुई क्योंकि विपक्ष पहले ही भाग लिया इसलिए सत्ता पक्ष का निर्णय बिना मतदान के ही सर्व सम्मति से स्वीकृत हो गया। सरकार की जीत हुई और विपक्ष भाग गया।
✍️ हितेन्द्र शर्मा
पत्रकार एवं साहित्यकार
कुमारसैन, शिमला हि.प्र.