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संस्कृत शिक्षक शिवकुमार शर्मा “शिवा” द्वारा गाए गीत “शिक्षण अधिगम सामग्री” के रूप में शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में किए जा रहे इस्तेमाल

हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग में कार्यरत संस्कृत शिक्षक शिवकुमार शर्मा “शिवा” द्वारा गाए संस्कृत गीतों व वीडियो का इस्तेमाल शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में किया जा रहा है। बता दें कि शिक्षक शिव कुमार ने पाठ्यक्रम में निर्धारित पद्यात्मक अध्यायों की धुन बनाकर उन्हें गाकर यूट्यूब से प्रसारित किया है। उनका कहना है कि शिक्षण अधिगम को प्रभावपूर्ण बनाने के लिए शिक्षण में रोचकता आवश्यक है। वहीं यदि शिक्षण के दौरान गायन विधि का प्रयोग किया जाए तो छात्र विशेष रुचि के साथ विषय को पढ़ते हैं व विषय को स्मरण करने में भी सहजता का अनुभव करते हैं व पाठ्यविषय के प्रति छात्रों का आकर्षण बढ़ता है। गायन विधि से कक्षा के सभी छात्र सक्रिय हो जाते हैं व आनन्द सहित अध्ययन करते हैं। लेकिन सभी विषयों में गायन विधि का प्रयोग नहीं किया जा सकता लेकिन पद्यात्मक अध्यायों को पढ़ाते समय गायन विधि का प्रयोग किया जाना चाहिए। संस्कृत विषय में पद्यात्मक अध्यायों को यदि सरल व रोचक धुन में गायन करते हुए पढ़ाया जाए तो छात्र विशेष रुचि से पढ़ेंगे। शिक्षक शिवकुमार का कहना है कि मैंने स्वयं अपने विद्यालय में छात्रों को गायनविधि द्वारा शिक्षण किया व छात्रों में अपेक्षित परिवर्तन देखे। छात्रों ने कठिन से कठिन अध्यायों को अत्यल्प काल में ही स्मरण कर लिया तथा संस्कृत विषय के प्रति उनकी रुचि में भी वृद्धि हुई। इसलिए मैंने पाठ्यक्रम के बहुत से अध्यायों की सरल व रोचक धुन बनाकर संगीत के साथ गाकर रिकॉर्ड किया ताकि अन्य शिक्षक व छात्र भी इसका लाभ ले सकें। इन वीडियो को हजारों लोगों द्वारा देखा गया व प्रशंसा की गई। अब इन वीडियो को शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में शिक्षण अधिमग सामग्री के रूप में दर्शाया जा रहा है। बीते दिनों हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन डाइट में आयोजित पंचदिवसीय शिक्षण कार्यशाला में “भारतजनताऽहम्” आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में निर्धारित अध्याय को दर्शाया गया तथा बिहार प्रान्त के एक कार्यशाला में “भारतीवसन्तगीति:” नौवीं कक्षा के अध्याय को शिक्षण अधिगम सामग्री के रूप में दर्शाया गया।

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