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आनी के शीगागी गाँव में हुआ अनूठी परंपरा का निर्वहन

क्षेत्र के गढपति देवता शमशरी महादेव और मालाणा के देवता जमलू के बीच निभाई जाती प्राचीन समय में हुए युद्ध की रस्म

✍️ छबिन्द्र शर्मा, आनी

आनी क्षेत्र के विभिन्न गाँवों में इन दिनों आराध्य गढ़पति देवता शमशरी के सतराला मेले की खूब धूम मची है। जिसमें ग्रामीणों द्वारा देव समाज की कई अनूठी परंपराओं का निर्वहन किया रहा है। बताते चलें कि आनी क्षेत्र के आराध्य गढपति देवता शमशरी महादेव सात साल के लंबे अंतराल के बाद इन दिनों अपने अधिकार क्षेत्र के 33 गाँवों के दौरे पर हैं। गत 13 अगस्त से शुरू हुए इस दौरे में देवता जिस जिस भी गाँव में जा रहे हैं. वहाँ देवता के स्वागत में भव्य मेलों क आयोजन किया जा रहा है। जिसमें ग्रामीण अपनी लोक संस्कृति के रंग में रंगकर खूब लुत्फ़ उठा रहे हैं।

देवता के इस विशेष फेरे मेले को सतराला कहा जाता है। खास बात यह कि इन मेलों में कई स्थानों पर अनूठी देव परंपराएं भी निभाई जा रही हैं। जो हमारी सदियों पुरानी देव संस्कृति की परिचायक हैं। इसी तरह की बिचित्र परंपरा आनी खंड की खणी पंचायत के अंतिम गाँव शीगागी में भी निभाई गई। जहाँ देवता शमशरी महादेव के गाँव की सीमा में प्रवेश करते ही. उनके रथ व देवलुओं पर ग्रामीणों द्वारा मिट्टी के ठेलों और बिच्छू बूटी तथा आटे की बौछार से प्रहार किया गया।

बाबजूद इसके देवता का रथ व देवलू उस प्रहार का सामना करते हुए पूरे जोश के साथ आगे गाँव की ओर बढ़ता है और युद्ध को जीत लेते हैं। देवता के गाँव की दहलीज पर कदम रखते ही युद्ध समाप्त हो जाता है और ग्रामीण देवता को नाचते गाते हुए पूरे उमंग व उत्साह के साथ देवालय स्थल तक ले जाते हैं। जहाँ देवता का भव्य स्वागत करने के बाद. उनके स्वागत में मेले का आयोजन करते हैं। उसके बाद देवता खुन्न पहुँचता है. जहाँ देवता के सम्मान में ग्रामीणों द्वारा एक भव्य नाटी का आयोजन किया जाता है।

शगागि में देवता को मिट्टी के ठेलों व बिच्छू बुट्टी से प्रहार की रस्म के पीछे क्या बजह है। इस बारे में हिम संस्कृति संस्था के अध्यक्ष शिव राज शर्मा का कहना है कि बुजुर्गों से सुनी दंत कथा के अनुसारआदि काल में शिगागि का क्षेत्र देवता जमलू के अधिकार क्षेत्र में था। इसी बीच देवता शमशरी महादेव ने उस क्षेत्र को अपने अधीनस्थ करने के लिए जमलू देवता पर आक्रमण किया। तब जमलू देवता के सेनानियों ने शमशरी महादेव पर प्रहार किया और उसे युद्ध में परास्त करने का प्रयास किया। मगर शमशरी महादेव ने बदले में ताबड़ तोड़ हमला बोलकर जमलू देवता को परास्त किया और उसके क्षेत्र को छीन कर. अपने अधिकार क्षेत्र में लिया। वर्तमान में उस समय की यह परंपरा आज भी शमशरी महादेव के शगागि गाँव में पधारने पर निभाई जाती है।

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