✍️ डॉ. जयनारायण कश्यप
समाजसेवा ऐसा उपेक्षित क्षेत्र है जिस में पहला कदम ही लोगों को शंकित करता है,, इस का छद्म उद्देश्य क्या है? क्या लाभ या स्वार्थ इस मनुष्य का है जो यह समाजसेवा से पूर्ण करना चाहता है?
क्या यह मनुष्य राजनीति में प्रवेश का इच्छुक है?
क्या यह मनुष्य बेकारी का हल लोगों से पैसा इकट्ठा कर निकालना चाहता है?
क्या यह व्यक्ति यश चाहता है?
या वाकई यह व्यक्ति समाजसेवा कर आत्मसंतुष्टि चाहता है?

👉 हिमालयन डिजिटल मीडिया के संवाद कार्यक्रम (Episode:247) में शामिल हुए समाजसेवी सुनील शर्मा
वास्तव में ही समाजसेवा ऐसा कर्म है जिसमें अपनी संतान का प्रवेश कोई परिवार नहीं चाहेगा,, इस मार्ग में कष्टों के सिवा कुछ प्राप्ति है भी? क्यों कोई परिवार अपने स्वार्थों को त्याग अपनी संतान समाज को समर्पित करना चाहेगा? यही सब अनुभव समाजसेवी सुनील शर्मा जी को हुआ,, किसी कम्पनी में सेवारत हो देश के प्रतिनिधि संस्थान पीजीआई चंडीगढ़ में कार्य कर रहे सुनील शर्मा जी नें जब यह देखा कि अनेक लोगों का जीवन धनाभाव के कारण कष्ट भरा है, तो इस क्षेत्र में प्रवेश करने का ठाना,, उन्होंने कम्पनी से त्यागपत्र दे, मैराथन द्वारा लोगों को समाजसेवा के लिए जागृत करने का निश्चय किया,, और जब यह निर्णय लिया, तो घर से ही विरोध आरम्भ हो गया,, माता और छोटे भाई ने पागल करार दे दिया और सोचा इसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गयी है,,
सुनील शर्मा नें इसके उत्तर में केवल यही कहा कि मैं अभी आपके प्रश्नों का उत्तर अभी नहीं दे सकता, समय ही आपको आपके प्रश्नों का उत्तर दे शांत करेगा।
एपिसोड 247 के संवादकर्ता डॉक्टर हिमेन्द्र बाली जी के सुगढ़ संचालन में समाजसेवी सुनील शर्मा का समाजसेवी पक्ष प्रभावशाली ढंग से उभर कर बाहर आया है,, उनके प्रश्न सुनील शर्मा के मंंतव्य और चरित्र को सपष्टता से सामने लाकर सभी को समाजसेवा के अर्थ समझाने में सक्षम है. सुनील शर्मा नें विभिन्न कर्म क्षेत्रों में समाजसेवा की आवश्यकता को सामने लाया, जिनमें मुख्यतः स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्र, शिक्षा क्षेत्र, पर्यावरण, जल व वन क्षेत्र, रक्तदान, अन्न संरक्षण आदि के बारे में बात की. ग्रामीण क्षेत्र से पलायन पर उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में ही रोजगार उपलब्ध कराने के बारे में जोर दिया ताकि लोग अपने ग्रामीण क्षेत्रों में वापसी करें,, भविष्य की उनकी योजनायें क्या हैं, इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि गाँव में ही सहायता समूहों का आरम्भ किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र में ही गाँव में फंड इकट्ठा कर जरूरतमंदों की सहायता की जा सके,,

नशा निवारणार्थ उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि खेलों में, संगीत में, नाट्य व साहित्य में, पर्यावरण संरक्षण में, समाजसेवा, या अपने कार्यक्षेत्र में रुचि को नशा बनायें, फिर चिट्टा, भांग, शराब या अन्य नशों की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी.
उनकी समाजसेवी संस्था का नाम ही RUN है,, आर से राष्ट्र, यू से उज्जवल, एन से निर्माण,, अर्थात वो मैराथन द्वारा राष्ट्र के उज्ज्वल निर्माण का उद्देश्य लेकर वह चले हैं. उन्होंने अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रदेश, देश एवं विदेश में अनेक मैराथन दौड़ें लगायी हैं और अनेक उपलब्धियां उनके नाम हैं.
समाजसेवी सुनील शर्मा जी को सहयोग देकर आप भी समाजसेवा में अपना जीवन सफल कर सकते हैं,, सुनील शर्मा जी को अब तक के अपने कार्यों के लिए हार्दिक बधाई एवं भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएँ , हिमालयन डिजिटल मीडिया को ऐसे कार्यक्रम के लिए साधुवाद।
डॉक्टर जयनारायण कश्यप, बिलासपुर हि.प्र.