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सरल एवं सरस काव्य है : सोमदत्त शर्मा आसरी विरचित श्रीशिवशक्तिशतकम्

संस्कृत का भविष्य बेहद उज्ज्वल है,यह तथ्य वर्तमान कालिक युवाओं के संस्कृतानुराग को देखकर स्पष्टतः परिलक्षित होता जा रहा है । इसे और अधिक पुष्ट किया है हरियाणा से संबंध रखने वाले सरस्वती साधक युवा सोमदत्त शर्मा आसरी ने जिन्होंने अपनी युवावस्था में ही ‘श्रीश्यामाश्यामशतकम्’ तथा ‘श्रीरमाकान्तस्मृतिरामणीयकम्’ की रचना के बाद एक अन्य शतक ‘श्रीशिवशक्तिशतकम्’ की रचना कर संस्कृत साहित्य जगत में अपनी रचनाधर्मिता का अच्छा परिचय दिया है ।

इस मनोरम काव्य का संपादन किया है हिमाचल प्रदेश के मण्डी जनपद से संबंध रखने वाले एक अन्य युवा वत्स देशराज शर्मा ने, जिन्होंने अपनी छोटी सी अवस्था में ही ‘वैदिकगणभारतम्’ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में संस्कृत की सेवा का बहुत बड़ा बीड़ा उठाया है ।

सोमदत्त शर्मा आसरी ने सरस एवं मनभावन छंद ‘शिखरिणी’ में १२३ पद्यों की रचना कर शिव और शक्ति के जिस रूप को सहजता से प्रतिपादित किया है उसे देखकर ही संभवतः वत्स देशराज शर्मा अपने ‘संपादकीय’ में लिखते हैं कि जो शिव-शक्ति प्रेम-भाव में श्रद्धा रखते हैं तथा ‘रुद्राष्टाध्यायी’ के ज्ञान में समर्थ नहीं हैं उनके लिए यह ग्रन्थ अत्यंत उपकारी सिद्ध होगा ।

भले ही काव्य के पद्यों को सरल तथा सहज भाव से प्रस्तुत किया गया है तथापि रचनाकार के ‘पुरोवाक्’ तथा पण्डित विष्णुकांत शुक्ल के ‘मंगलाशंसनम्’ की शैली “बाणोच्छिष्टं जगत्सर्वम्” गद्य साहित्य के श्रेष्ठतम रचनाकार बाणभट्ट की याद दिलाती है ।

माधव देशपांडे,मनतोष भट्टाचार्य, रणबीर भारद्वाज, डॉ.सुबोध कुमार मिश्र भागवती की मंगलाशंसा के पश्चात् रचनाकार कृतज्ञता ज्ञापित करने उपरांत मंगलाचरण कर काव्य की शुरुआत “नने ! नोनोनूनन्ननननुननूनन्निनिनिनी….” एकाक्षर ‘न’ से ही सम्पूर्ण पद्य की रचना कर महाकवि भारवि का स्मरण भी कराते हैं ।

काव्य के १२३ पद्यों में शिव-शक्ति के स्वरूप तथा उनकी आराधना-साधना करते हुए इनकी एकरूपता का चित्रण भी करते हैं जिसे संपादक ने अपने ‘संपादकीय’ में यूँ कहा है — “भगवान् शिव के अर्धनारीश्वर रूप से यह स्पष्ट हो जाता है कि शिव और शक्ति में कोई अन्तर विशेष नहीं है।” संभवतः तभी कवि काव्य के अंतिम पद्य की अंतिम पंक्ति में कह उठते हैं — “शिव: कर्ता धर्ता शिवमयमिदं विश्वमखिलम्” ।

युवा संपादक इतने से ही संतुष्ट नहीं होते बल्कि इसी काव्य पर आधारित राष्ट्र स्तरीय श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता भी आयोजित करते हैं जिसमें हिमाचल के युवा एवं चर्चित संस्कृत कवि शिवा शर्मा सहित देश के विभिन्न प्रांतों से युवा संस्कृतानुरागियों ने भाग लेकर अपने संस्कृत प्रेम को प्रदर्शित करते हुए सिद्ध किया है कि संस्कृत का भविष्य धूमिल नहीं बल्कि बेहद उज्ज्वल है।

…✍🏻 आचार्य ओमप्रकाश राही

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