कुमारसैन उपमंडल की ग्राम पंचायत सिहल, विकास खण्ड नारकण्डा के अंतर्गत आयुर्वैदिक औषधालय धग्याना के हालात दयनीय है। खस्ताहाल अस्पताल न जाने कब कहां से गिर जाए इसलिए स्थानीय लोग इस आयुर्वैदिक औषधालय में जाने से भी डरते हैं।
जिला परिषद सदस्य सुभाष कैंथला ने बताया कि जलवायु एवं भौगौलिक परिस्थितियों के अनुरूप निर्माण न करने व वर्तमान में भी विभाग द्वारा संज्ञान न लिये जाने के कारण, निर्माण के आठ वर्ष के बाद ही भवन की दुर्गति हो गयी। बर्फ वाले क्षेत्र में लेंटर डाल दिया गया जब कि यहां लोहे की छत होनी चाहिए थी। इसका विभाग द्वारा क्षति का प्राकलन 2019 में शिमला भेजा था किन्तु अभी तक स्वीकृति नहीं आई..!! उनका कहना है कि रिपेयर मेन्टेन्स के लिए हमारे पास बज़ट बहुत ही सीमित होता है।

“मैं व्यक्तिगत रूप से निदेशक उप निदेशक और जिला आयुर्वेदिक अधिकारी से मिला हूँ नतीजा ढाक के तीन पात : सुभाष कैंथला, जिला परिषद सदस्य”
दरअसल स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में सरकार कोई ऐसी नीति तैयार नहीं कर पाई है, जिससे हर गांव तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाया जा सके। यदि ऐसा ही हाल रहा तो अस्पतालों के नाम पर केवल खस्ताहाल बिल्डिंग ही रह जाएगी। सरकार को इस मामले में अधिक गंभीरता से कदम उठाने चाहिए, ताकि आम आदमी को स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।