हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद् ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि दो वर्ष का अनुबंध सेवाकाल पूरा कर चुके एवं सितम्बर में नियमित होने की आश लगाए बैठे कर्मचारियों को एकबार मार्च में नियमित करने की जो खबर आ रही है। यह सही नहीं है। नियमितीकरण की व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ न कर उसे यथावत रखा जाये। क्योंकि अप्रैल-मई मास में दो वर्ष पूर्ण कर चुके हजारों कर्मचारियों को अब नियमित होने की आशा लगी है और यदि मार्च में ही नियमित किया जाता है तो वे दो वर्ष के स्थान पर तीन वर्षों में नियमित होंगे और जो लाभ उन्हें 6 महीने पहले मिलने चाहिए वे 6 महीने बाद मिलेंगे। हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद् के प्रदेशाध्यक्ष डॉ मनोज शैल ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि वर्तमान में नियमितीकरण की प्रक्रिया को यथावत रखा जाये। यदि भविष्य में वर्ष में एकबार नियमितीकरण की सरकार की योजना है तो नियुक्तियां भी तदनुसार ही हों ऐसी व्यवस्था बनाई जाये। दिसम्बर तक चयन प्रक्रिया सम्पन्न हो ताकि जनवरी-फरवरी में नियुक्तियां मिल सके और मार्च मास में नियमितीकरण किया जा सके। इस संदर्भ में सरकार को कर्मचारी हित को ध्यान में रखते हुए विचार करना चाहिए।
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