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प्रशासनिक सदस्य केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण प्रधान पीठ तरुण श्रीधर और विश्व स्वास्थ्य संगठन में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर सेवारत मनीषा श्रीधर ने ममलेश्वर महादेव मंदिर ममेल में लिया आशीर्वाद

हितेन्द्र शर्मा, करसोग

करसोग उप-मण्डल का ऐतिहासिक ममेल गांव का गौरव है कि इसका वैभवशाली अतीत रामायण और महाभारत से जुड़ा है। इतिहासकार, साहित्यकार और शिक्षाविद डाॅक्टर हिमेंद्र बाली ‘हिम” का कहना है किइन्द्र द्वारा भृगु ऋषि के तपश्चर्या को खण्डित करने के प्रयोजन से प्रेषित किन्नर बाला ममलेशा के नाम से ही ममेल नाम की व्युत्पति हुई। ममलेशा व ऋषि भृगु की तेजस्वी पुत्र विमल व अमल ने वेदों के मंत्रों का प्रणयन करसोग धरा पर किया। यहीं भृगु ऋषि ने ममेल में शिव की आराधना की।

त्रेतायुग के प्रारम्भिक काल में परशुराम ने ममेल में महाकाल की आराधना कर इस नगरी को बसाया। लाक्षागृह की घटना के बाद पाण्डव कुन्ती सहित करसोग में रहे और ममेल में महादेव की आराधना की। यहीं पाण्डवों ने अस्सी शिवलिंग प्रतिष्ठित किये जिन्हे आज भी यहां देखा जा सकता है। इन शिवलिंगों में से बहुत से शिवलिंग विलिन भी हो रहे हैं। ममलेश्वर महादेव युगों से यहां का धर्म संस्कृति के केन्द्र में प्रतिष्ठित हैं।भारतीय प्रशासनिक सेवा के दोनों अधिकारियों ने ममलेश्वर महादेव के दर्शन के साथ 5160 वर्षों से जल रहे अखंड धूने, 200 ग्राम के गेहूं के दाने और विशाल ढोल के भी दर्शन किए। मनीषा श्रीधर और तरुण श्रीधर ने ममलेश्वर महादेव के दर्शन, पूजन कर आशीर्वाद लिया।

इस अवसर यर ममलेश्वर महादेव मंदिर समिति की ओर से पुजारी अरविंद शर्मा ने दोनों भारतीय प्रशासनिक अधिकारियों और साथ आए श्रद्धालुओ को सरोपा भेंट किया।इस अवसर पर नायक तहसीलदार शांता शुक्ला, कानूनगो मोतीराम चौहान, संस्कृति मर्मज्ञ डाॅक्टर जगदीश शर्मा, समाजसेवी विनोद गुप्ता,रवि चंदेल पुनीत कुमार,आशा शर्मा आदि भी उपस्थित थे।तरुण श्रीधर का कहना है कि विश्व की प्राचीनतम धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक गावों में ममलेश्वर महादेव अद्वितीय है।

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