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उपायुक्त कार्यालय में आरटीआई पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

विशेषज्ञों ने पीआईओ को बताई आरटीआई की बारीकियां

उपायुक्त कार्यालय शिमला के बचत भवन सभागार में सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) 2005 पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया, जिसमें जिला के विभिन्न विभागों से लगभग 55 पीआईओ एवं अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। प्रथम दिवस कार्यशाला को तीन सत्र में विभाजित किया गया। प्रथम सत्र में सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवाएं अधिकारी गोपाल शर्मा ने प्रतिभागियों को आरटीआई अधिनियम और नियमों के मुख्य प्रावधानों से अवगत करवाया तथा आरटीआई अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आरटीआई अब ऑनलाइन माध्यम से भी शुरू की जा चुकी है, जिसके समयबद्ध निपटान के लिए सभी को आवश्यक कदम उठाने होंगे।

कार्यशाला के दूसरे सत्र में हिमाचल प्रदेश पूर्व सूचना आयुक्त सेवानिवृत भारतीय प्रशासनिक सेवाएं अधिकारी नरिंदर चौहान ने प्रतिभागियों को आरटीआई अधिनियम, 2005 के मुख्य प्रावधान, एचपी आरटीआई नियम 2006, राज्य सूचना आयोग की शक्तियां, पीआईओ एवं एपीआईओ के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि आरटीआई के तहत सूचना प्रदान करने के लिए हमें नियमों का पता होना आवश्यक है ताकि अधिनियम के तहत मांगी गई वांछित सूचना को सही तरीके से उपलब्ध करवाया जा सके। वहीं कार्यशाला के अंतिम सत्र में सह आचार्य लोक प्रशासन हिपा राजिंदर सिंह कपूर ने कहा कि अधिनियम में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कोई भी भारतीय नागरिक किसी भी सार्वजनिक अथवा सरकारी प्राधिकरण से किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र है। साथ ही इस अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना को आवेदन की तारीख से 30 दिनों की अवधि के भीतर प्रदान करने की व्यवस्था की गई है।

कार्यशाला के दौरान परस्पर संवाद भी स्थापित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने पूछे गए प्रश्नों का विस्तृत जवाब दिया। दिनांक 31 जुलाई, 2024 को कार्यशाला के दूसरे दिन प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के लगभग 45 सदस्य भाग लेकर सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 पर प्रशिक्षण लेंगे। इस अवसर पर अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (कानून एवं व्यवस्था) अजित भारद्वाज एवं अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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