✍️ विकास शर्मा
सदियों से चलता आ रहा जुन्गा का एतिहासिक और सांस्कृतिक कड़ियों को जोड़ता दशहरा मेला मानो अपने अस्तित्व को खोजने में लगा हो, इसी वर्ष जनता को जुन्गा दशहरे के जिला स्तरीय होने की खुशखबरी मिली थी लेकिन ये खुशखबरी उस समय धूमिल हो गई जब लोगों को पता चला कि मेला जुन्गा पाठशाला के प्रांगण में जहां सदियों से होता आ रहा है वहाँ नही होगा, हर वर्ष मेले के आयोजन का जिम्मा स्थानीय पंचायत का होता था लेकिन जिला स्तरीय होते ही ये जिम्मेवारी जिलाधीश की हो गई जिसे पूरा करने के लिए जुन्गा तहसील को लगाया गया लोगों से पैसे भी इकट्ठे किये गए लेकिन मेले से दो दिन पहले पता लगता है कि शिक्षा निदेशालय से मेला लगाने की अनुमति नही मिली, मेले में रावण दहन के लिए श्रीराम परिवार की झाँकी निकाली जाती है जो मेले का मुख्य आकर्षण होने के साथ साथ हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी मजबूत करती है साथ ही जुन्गा तहसील से जुड़ी 14 पंचायतों के लोगों के लिए भी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहती है हर वर्ष निदेशालय से अनुमति के लिए पंचायती स्तर पर भाग दौड़ की जाती थी, लेकिन क्या जिला स्तरीय होते ही मेला सरकारी तंत्र की बलि चढ़ गया या बात कुछ और है ये तो समय बताएगा…