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Editorial/सम्पादकीय News राजनीति

हिमाचल में महिलाओं की सुरक्षा पर घमासान

कहने को तो दुनिया में आधी आबादी महिलाओं की है और महिलाओं का परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व के विकास में महत्वपूर्ण योगदान भी है परंतु समाज में महिलाओं की बदतर स्थिति से भी इनकार नहीं किया जा सकता। विभिन्न देशों में अलग-अलग मत मजहब संप्रदायों में महिलाओं की स्थिति दयनीय बनी हुई है। कहीं उन्हें समान अधिकार प्राप्त नहीं है, कहीं उन्हें केवल खेती और भोग की वस्तु समझा जाता है और आए दिन महिलाओं पर अत्याचार बलात्कार और उन्हें जलील करने की कई घटनाएं समाचार पत्रों और मीडिया की सुर्खियां बनती रही है।

हालांकि राजनीतिक स्वार्थ के चलते कुछ दल महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के विरोध में कई आंदोलन चलाते रहे हैं परंतु यह सब कुछ सिलेक्टिव रहता है। ऐसे आंदोलन राजनीति, पक्ष विपक्ष को देखकर चलाए जाते हैं। उनका एजेंडा अधिकतर महिलाओं के बहाने सत्ता का विरोध करना मात्र होता है।

मणिपुर में महिला के साथ हुई दर्दनाक घटना पर पूरे देश भर में हल्ला होता रहा परंतु जब संसद में बहस करने की बारी आई तो विपक्ष बायकाट कर गया। राजस्थान आदि अन्य प्रदेशों में भी महिलाओं के प्रति अत्याचार की घटनाएं सामने आई परंतु तब विपक्ष और अधिकांश मीडिया खामोश रहा इससे स्पष्ट होता है कि महिलाओं के नाम पर केवल राजनीति होती है। महिलाओं के दुख दर्द को बांटने की कोशिश बहुत कम रहती है।

हिमाचल प्रदेश में दुर्भाग्य से इस सप्ताह जिला हमीरपुर के भोरंज, जिला शिमला के कुमारसैन और जिला मंडी के जोगिंद्रनगर में भी तीन घटनाएं हुई। भोरंज में हुई घटना में एक परिवार के लोगों द्वारा बेरहमी से महिला के बाल काटकर गांव में घुमाने की घटना सामने आई तो कुमारसैन की घटना में एक नाबालिग स्कूली छात्रा को एक सेवानिवृत्त व्यक्ति द्वारा छेड़खानी की वारदात पर स्थानीय महिलाओं ने रैली निकाल कर आक्रोश जताया और जोगिंद्रनगर के चौतड़ा में 8 वर्षीय लड़की की मृत्यु को लेकर ग्रामीणों में चक्का जाम करने की धमकी दी है।

कुमारसैन में घटना की पुलिस द्वारा रिपोर्ट लिखने और सहयोग करने में आनाकानी करने के समाचार है। तीनों ही घटनाएं देवभूमि हिमाचल को शर्मसार करने और कानून व्यवस्था की पोल खोलने वाली है। यद्यपि भोरंज की घटना का मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के कारण सरकार द्वारा संज्ञान लिया गया है परंतु कुमारसैन की घटना की गूंज अभी तक सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुंच पाई है। बेहतर रहेगा, इस तरह की घटनाओं पर राजनीति न करके महिलाओं के दुख दर्द को समझने तथा उसका समाधान तलाशने का प्रयास किया जाए।

✍️ हितेन्द्र शर्मा
लेखक एवं साहित्यकार

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